
प्रवर्तन निदेशालय (ED), अहमदाबाद ने मनी-लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत बिटकनेक्ट क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी मामले में 11 और 15 फरवरी को गुजरात में दबिश दी। तलाशी के दौरान, 1646 करोड़ रुपए मूल्य की विभिन्न क्रिप्टो करेंसी बरामद और जब्त की गई। इसके अलावा, 13,50,500 रुपए नकद, एक महंगी कार और कई डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं।
ED ने सीआईडी, क्राइम, पुलिस स्टेशन, सूरत की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। पीएमएलए के तहत जांच के दौरान, पता चला कि नवंबर, 2016 से जनवरी 2018 की अवधि के दौरान, आरोपी व्यक्तियों ने भारत में स्थित निवेशकों सहित दुनिया भर के निवेशकों से बिटकनेक्ट के कथित लेन्डिंग प्रोग्राम में निवेश के रूप में प्रतिभूतियों की धोखाधड़ी और अपंजीकृत पेशकश और बिक्री की।बिटकनेक्ट के संस्थापक ने एक गैर-निगमित संगठन बनाया। इसके बाद प्रमोटरों का एक विश्वव्यापी नेटवर्क स्थापित किया, और उन्हें कमीशन का भुगतान करके उनके प्रचार प्रयासों के लिए पुरस्कार दिया। निवेशकों को नकदी और बिटकॉइन के रूप में धन जमा करने को प्रेरित करने के लिए यह बताया गया कि बिटकनेक्ट एक कथित मालिकाना वोलेटिलिटी सॉफ्टवेयर ट्रेडिंग बोट (ट्रेडिंग बोट) तैनात करेगा। उन्होंने दावा किया था कि यह निवेशकों के धन का उपयोग करके प्रति माह 40% तक का रिटर्न उत्पन्न करेगा।
उन्होंने बिटकनेक्ट वेबसाइट पर काल्पनिक रिटर्न पोस्ट किया जो औसतन प्रति दिन 1% या वार्षिक आधार पर लगभग 3,700% था। दरअसल यह दावे दिखावा थे, क्योंकि आरोपियों को पता था कि बिटकनेक्ट ने अपने कथित ट्रेडिंग बोट के साथ व्यापार करने के लिए निवेशकों के धन का उपयोग नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपने स्वयं के लाभ के लिए निवेशकों के धन को निकाल लिया। अपने सहयोगियों के लाभ के लिए, उन निधियों को उनके द्वारा नियंत्रित डिजिटल वॉलेट में स्थानांतरित कर दिया।
जांच के दौरान, ईडी, अहमदाबाद ने उक्त क्रिप्टो वॉलेट की उत्पत्ति और नियंत्रकों को उजागर करने के लिए कई क्रिप्टो वॉलेट में किए गए लेनदेन के जटिल जाल की जांच की। यह पाया गया कि लेन-देन को अनट्रेसेबल बनाने के लिए डार्क वेब के माध्यम से कई लेन-देन किए गए थे। हालांकि, कई वेब वॉलेट को ट्रैक करके और ग्राउंड इंटेलिजेंस इकट्ठा करके, ईडी वॉलेट और परिसर को चिन्हित करने में सफल हुई, जहां उक्त क्रिप्टो करेंसी वाले डिजिटल डिवाइस उपलब्ध थे। इसके आधार पर दबिश देकर तलाशी करते हुए डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए और 1646 करोड़ रुपये (लगभग) की क्रिप्टो करेंसी भी जब्त की गईं (ईडी के खाते में स्थानांतरित)। इसके अलावा 13,50,500 रुपये नकद, एक कार और कई डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं।
इससे पहले, इस मामले में, ईडी अहमदाबाद की टीम 489 करोड़ रुपये (लगभग) की चल और अचल संपत्ति भी जब्त कर चुकी है। ऑनलाइन स्रोतों के माध्यम से यह भी पता चला है कि विदेशी नागरिकों ने भी बिटकनेक्ट में निवेश किया है। बिटकनेक्ट मामले का मुख्य आरोपी भी अमरीका में जांच के दायरे में है।
Published on:
15 Feb 2025 11:04 pm
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