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जीएसएफसी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 17 में से 12 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम

समारोह में डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक और नीति आयोग के पूर्व सदस्य पद्म भूषण डॉ. वी.के. सारस्वत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके हाथों 17 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और 15 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल प्रदान किए गए। इस वर्ष भी छात्राओं ने शानदार शैक्षणिक प्रदर्शन किया और 17 में से 12 गोल्ड मेडल छात्राओं ने हासिल किए। विद्यार्थियों को डिग्रियां यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पी.के. तनेजा ने प्रदान की।
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Female Students Bag 12 Out of 17 Gold Medals at GSFC University Convocation

दीक्षांत समारोह में डिग्री प्रदान करते हुए।

बदलते तकनीकी माहौल में निरंतर सीखते रहें, बदलाव को स्वीकार करें और नवाचार करें : डॉ. सारस्वत

वडोदरा. गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स (जीएसएफसी) यूनिवर्सिटी 8वां दीक्षांत समारोह शनिवार को यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित किया गया। समारोह में 17 में से 12 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम रहे। यूनिवर्सिटी की स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ साइंस और स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप के कुल 815 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 488 छात्र और 327 छात्राएं शामिल हैं।
समारोह में डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक और नीति आयोग के पूर्व सदस्य पद्म भूषण डॉ. वी.के. सारस्वत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके हाथों 17 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और 15 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल प्रदान किए गए। इस वर्ष भी छात्राओं ने शानदार शैक्षणिक प्रदर्शन किया और 17 में से 12 गोल्ड मेडल छात्राओं ने हासिल किए। विद्यार्थियों को डिग्रियां यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पी.के. तनेजा ने प्रदान की।
डॉ. सारस्वत ने कहा कि तकनीक, नवाचार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत को विकसित भारत @ 2047 की दिशा में आगे बढ़ाने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. सारस्वत ने तेजी से बदलते तकनीकी माहौल में निरंतर सीखते रहने, बदलाव को स्वीकार करने और नवाचार करने की अपील की। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, डिजिटल कौशल, तार्किक क्षमता, टीमवर्क, चुनौतियों का सामना करने की क्षमता तथा सबसे महत्वपूर्ण ईमानदारी और अच्छे चरित्र के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान का उपयोग समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील भी की।
यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष तनेजा ने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत के अंत का प्रतीक है, लेकिन साथ ही यह नई संभावनाओं और जिम्मेदारियों से भरी नई यात्रा की शुरुआत भी है। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि आपकी डिग्री अंत नहीं, बल्कि अवसरों, आकांक्षाओं और जिम्मेदारियों से भरी नई यात्रा की शुरुआत है। निरंतर सीखते रहें, बदलाव को स्वीकार करें और आगे बढ़ें, लेकिन चरित्र और गुणवत्ता के महत्व को कभी न भूलें। यूनिवर्सिटी के मूल्यों को गर्व के साथ आगे बढ़ाएं और जहां भी जाएं, यूनिवर्सिटी के श्रेष्ठ प्रतिनिधि बनें।

11 वर्षों में 26 शैक्षणिक कार्यक्रम

यूनिवर्सिटी की पिछले 11 वर्षों की प्रगति का उल्लेख करते हुए तनेजा ने बताया कि यूनिवर्सिटी की शुरुआत केवल 2 शैक्षणिक कार्यक्रमों से हुई थी और आज यहां 26 कार्यक्रमों में 3,400 से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर जी.आर. सिंहा ने यूनिवर्सिटी की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें शैक्षणिक विकास, विभिन्न उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों, उद्योगों के साथ जुड़ाव, विद्यार्थी विकास और शैक्षणिक वर्ष के दौरान हुई अन्य महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी गई।