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भाजपा के पूर्व विधायक व मंत्री जवाहर चावड़ा ने पार्टी के खिलाफ बजाया बिगुल

पूर्व कैबिनेट मंत्री जवाहर चावड़ा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर केन्द्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के बयान पर पलटवार किया।

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jawahar

भाजपा के पूर्व विधायक व मंत्री जवाहर चावड़ा

अहमदाबाद. लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी भाजपा में आंतरिक कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही। भाजपा के पूर्व विधायक व कैबिनेट मंत्री रहे जवाहर चावड़ा ने पार्टी के खिलाफ विरोध का बिगुल बजा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर केन्द्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के बयान पर पलटवार किया है। साथ ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भाजपा का चुनाव चिह्न और संबंधित सभी पोस्ट भी हटा दिए।

चावड़ा ने अपने वीडियो में केन्द्रीय मंत्री मांडविया पर निशाना साधा और भाजपा के चुनाव चिह्न वाला कागज भी हटाते नजर आए। मांडविया ने चावड़ा का नाम लिए बिना यह बयान दिया था कि जो अपने नाम के साथ भाजपा लिखते हैं उन्हें पार्टी के लिए काम करना चाहिए। चावड़ा ने वीडियो में कहा कि यह बात उन्हें चुनाव से पहले या चुनाव के दौरान बोलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरी पहचान अलग है। मांडविया पोरबंदर लोकसभा सीट से सांसद है और इसके तहत माणावदर विधानसभा सीट भी शामिल है।भाजपा के पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई करने से पहले ही चावड़ा ने वीडियो जारी किया और मांडविया का नाम लेते हुए पलटवार भी किया।

2019 में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए

लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहे 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार माणावदर सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। हालांकि 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद वे भाजपा में शामिल हुए। 2019 के उपचुनाव में वे अपनी परंपरागत सीट- माणावदर- से जीते। इसके बाद उन्हें विजय रूपाणी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया। हालांकि रूपाणी मंत्रिमंडल को हटाते समय उन्हें भी मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे कांग्रेस के अरविंद लाडाणी से हार गए थे हालांकि लाडाणी भी इस वर्ष लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो गए। उपचुनाव में उन्हें जीत मिली।

लाडाणी को टिकट दिए जाने से नाखुश थे

चावड़ा लाडाणी को टिकट दिए जाने से चावड़ा नाखुश थे और वे चुनाव के दौरान प्रचार अभियान से भी दूर रहे। वे उपचुनाव में ही नहीं बल्कि पार्टी के पोरबंदर लोकसभा सीट पर चुनाव अभियान से भी अलग रहे। बताया जाता है कि लाडाणी को हराने को लेकर चावड़ा के पुत्र ने कथित रूप से बैठक भी की थी और कांग्रेस उम्मीदवार के लिए काम भी किया था। हालांकि लाडाणी व मांडविया दोनों चुनाव जीत गए।