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Gujarat: मोदी के करीबी भाजपा के पूर्व विधायक सुनील ओझा नहीं रहे

गुजरात भाजपा के पूर्व विधायक सुनील ओझा का बुधवार सुबह नई दिल्ली के अस्पताल में निधन हो गया। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीबी माने जाते थे। हाल ही में उन्हें बिहार का सह प्रभारी बनाया गया था। इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी थे। मूल रूप से गुजरात के भावनगर जिले के रहने वाले ओझा भावनगर दक्षिण सीट से दो बार (1998, 2002) विधायक चुने गए थे।  

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Gujarat: मोदी के करीबी भाजपा के पूर्व विधायक सुनील ओझा नहीं रहे

Gujarat: मोदी के करीबी भाजपा के पूर्व विधायक सुनील ओझा नहीं रहे

गुजरात भाजपा के पूर्व विधायक सुनील ओझा का बुधवार सुबह नई दिल्ली के अस्पताल में निधन हो गया। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीबी माने जाते थे। हाल ही में उन्हें बिहार का सह प्रभारी बनाया गया था। इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी थे। मूल रूप से गुजरात के भावनगर जिले के रहने वाले ओझा भावनगर दक्षिण सीट से दो बार (1998, 2002) विधायक चुने गए थे।

प्रधानमंत्री ने ओझा के निधन पर शोक व्यक्त किया। अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि ओझा के निधन का समाचार आघातजनक है। भाजपा संगठन के विस्तार और समाज सेवा क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रेहगा। वाराणसी में भी उनका संगठनात्मक कार्य सराहनीय रहा।उनके निधन पर गुजरात प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सी आर पाटिल और गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने शोक व्यक्त किया है।

पाटिल के मुताबिक उनका प्रभावशाली व्यक्तित्व व व्यूहा्त्मक सूझबूझ सदा स्मरण में रहेंगे। गोहिल के अनुसार अयोग्य होने वाले मुद्दों व अन्याय के सामने आवाुज उठाने की क्षमता रखते थे। उनके अवसान से भावनगर के सार्वजनिक जीवन को क्षति हुई है।

वाराणसी में भी अहम संगठनात्मक कार्य

ओझा पर पीएम की संसदीय सीट वाराणसी की देखरेख की जिम्मेवारी थी। उनकी पार्टी के लिए चुनावी रूप से काफी अहम उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक कार्य में प्रभावी भूमिका रही।

बगावत के बाद भाजपा में लौटे

वर्ष 2007 में टिकट नहीं मिलने पर ओझा ने पार्टी से बगावत की थी। इसके बाद वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने गोरझन झड़फिया की महागुजरात जनता पार्टी में शामिल हुए हालांकि बाद में वे भाजपा में वापस लौटे।