
देश में हर एक लाख में से 70 से 90 लोग कैंसर के मरीज
अहमदाबाद. देश में वर्ष 2020 में कैंसर के नए 13 लाख मामले सामने आए थे। आशंका है कि आगामी 2030 तक यह आंकड़ा 15 लाख के भी पार पहुंच सकते हैं। देश में हर एक लाख में से 70 से 90 लोगों में कैंसर की पुष्टि होती है। इस रोग के कारण सात लाख मरीजों को जान गंवानी भी पड़ी थी।
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल परिसर में गुजरात कैंसर एंड रिसर्च सेंटर (जीसीआरआई) मेें कैंसर से सतर्कता विषय पर आयोजित परिसंवाद में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। गुजरात प्रेस अकादमी, प्रादेशिक सूचना कार्यालय अहमदाबाद और जीसीआरआई के संयुक्त तत्वाधान में जीसीआरआई परिसर में यह आयोजन किया गया। जिसमें जीसीआरआई के निदेशक डॉ. शशांक पंड्या ने कहा कि भारत में कैंसर के कुल मामलों में से पुरुषों में सबसे ज्यादा फेफड़े, पेट और मुंह के कैंसर ज्यादा होते हैं। जबकि महिलां में ब्रेस्ट, गर्भाशय मुख और मुंह के कैंसर अधिक सामने आते हैं। इस मौके पर पेलियाटिव मेडिसिन थेरेपी की विशेषज्ञ डॉ. प्रीति संघवी ने कहा कि यह थेरेपी उन मरीजों के लिए है जो असाध्य कैंसर से पीडि़त हैं। इसमें शारीरिक, भावनात्मक एवं मानसिक पीड़ा से राहत देने का प्रयास किया जाता है। ऐसे मरीजों के लिए यह महत्वपूर्ण उपचार पद्धति है।
60 फीसदी मरीज विलंब से आते हैं उपचार को
परिसंवाद में मौजूद जीसीआरआई के हैड एंव नेक विभाग के चिकित्सक डॉ. प्रियांक राठौड़ ने बताया कि भारत में सामने आने वाले मुंह, एवं गले के कैंसर के मरीजों में से 60 फीसदी तो एडवांस स्टेज में आते हैं। यदि इस तरह के मरीज समय रहते उपचार के लिए आए तो अच्छे परिणाम आ सकते हैं। इस तरह के कैंसर के जिम्मेदार कारकों में तम्बाकू उत्पाद का सेवन बड़ा कारण है। इसके लक्षणों के बारे में उन्होंने बताया कि लंबे समय तक मुंह में छाले रहना, मुंह और गले के भाग में रक्त निकलना और गांठ महसूस होना आदि हैं।
कैंसर की महिला मरीजों में से 25 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर के
जीसीआरआई के ब्रेस्ट कैंसर विशेषज्ञ डॉ. केतुल पुंज ने बताया कि विश्व में महिलाओं में पाए जाने वाले विविध प्रकार के कैंसर में से 25 फीसदी ब्रेस्ट के होते हैं। हालांकि गुजरात में यह दर लगभग 21 फीसदी है। पश्चिम देशों में ब्रेस्ट कैंसर की औसत आयु 60 वर्ष है जबकि भारत में यह 50 वर्ष की आयु में हो सकता है। उन्होंने सलाह के तौर पर कहा कि हरेक महिला को 40 वर्ष की आयु के बाद हर वर्ष जांच करानी चाहिए। साथ ही 25 वर्ष से अधिक आयु में हरेक महिला को प्रति महीने खुद को जांच करनी चाहिए।
गर्भाशय मुख के कैंसर से एक वर्ष में हो गई 77 हजार से अधिक की मौत
जीसीआरआई की गाइनेक विभागा की प्रोफेसर डॉ. बीजल पटेल ने बताया कि जीसीआरआई में आने वाले कैंसर के मरीजों में से 80 फीसदी महिलाएं काफी विलंब से आती हैं। गत वर्ष देश में गर्भाशय मुख में कैंसर के 123907 मरीज सामने आए थे। इनमें से 77384 की मौत भी हो गई थी। हर तीन वर्ष में महिलाओं को उचित टेस्ट कराने की सलाह भी दी गई।
Published on:
01 Aug 2021 09:48 pm
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