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सरकार ने किस आधार पर बच्चों के प्रवेश के लिए टारगेट तय किया?

आरटीई के अमलीकरण पर दायर पीआईएल फैसला सुरक्षित.....

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अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के उचित अमलीकरण के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
न्यायाधीश एम. आर. शाह व न्यायाधीश ए. वाई. कोगजे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कहा कि कानून के हिसाब से 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रखे जाने का प्रावधान है तो फिर राज्य सरकार ने किस आधार पर प्रवेश के लिए टारगेट (लक्ष्य) तय किया?
इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य ने सभी 9 हजार स्कूलों में दाखिला दिया है। पहले आरटीई के तहत घर से एक किलोमीटर तक के स्कूल के चयन का विकल्प था, जिसे बढ़ाकर अब छह किलोमीटर कर दिया गया है। इस कारण छह किलोमीटर के भीतर किसी भी स्कूल में बच्चा दाखिला ले सकता है। वर्ष 2016-17 मेंं निश्चित लक्ष्य रखकर बच्चों को प्रवेश दिया गया। इसके बाद वर्ष 2017-18 में आरटीई के तहत दाखिले के लिए पोर्टल लांच किया गया। अब वर्तमान वर्ष के लिए सरकार ने 33 जिले व सात महानगरपालिकाओं में 575 वेरिफायर्स (सत्यापक) की नियुक्ति की है। इससे स्कूलों की उचित जानकारी व डाटा की जांच कर सत्यता का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा मंजूरी प्राप्त 298 स्कूलों को भी आरटीई कानून के तहत शामिल किया गया है। इस वर्ष एक लाख पांच हजार विद्यार्थी आरटीई के तहत प्रवेश पा सकेंगे।

अच्छे स्कूलों में पढऩा हर अभिभावक का सपना

खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए यह अवलोकन किया कि राज्य सरकार ने किस तरह से और किन स्कूलों को आरटीई के तहत प्रवेश देने की बात तय की? क्या राज्य सरकार ने अच्छे स्कूलों को अलग रखकर 60 हजार विद्यार्थियों को सामान्य स्कूलों में प्रवेश दिया है? प्रत्येक अभिभावकों का सपना होता है कि उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में दाखिला लें। इस कानून का उद्देश्य यह है कि समाज के गरीब तबकों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। कानून के तहत 25 फीसदी सीटें इन विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखनी चाहिए।
इससे पहले गत सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा था कि राज्य सरकार ने राज्य की स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश दिलाने को लेकर आरटीई के कानून के उचित ढंग से अमलीकरण के संबंध में क्या कार्रवाई की? छात्र संदीप मुज्यासरा की ओर से दायर जनहित याचिका पर खंडपीठ ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में यह जानकारी मांगी गई है कि आरटीई के तहत राज्य सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2017-18 में कितनों बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिया गया। नई आरंभ स्कूलों में आरटीई के कानून के हिसाब से 25 फीसदी सीटें आरक्षित रख प्रवेश प्रक्रिया नहीं होने को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में यह दलील दी गई थी कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में कितनी स्कूलों को मंजूरी दी गई, कितने स्कूलोंं ने 25 फ़ीसदी सीटें आरटीई के तहत आरक्षित रखी हैं? साथ ही इन स्कूलों में कितने बच्चों को दाखिला दिया गया?