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Gujarat: दुर्लभ बीमारी एप्लास्टिक एनिमिया से पीडि़त बालिका का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

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Gujarat:  दुर्लभ बीमारी एप्लास्टिक एनिमिया से पीडि़त बालिका का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

Gujarat: दुर्लभ बीमारी एप्लास्टिक एनिमिया से पीडि़त बालिका का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

Gujarat: Bone marrow transplant of a girl suffering from rare disease aplastic anemia

उदय पटेल

दुर्लभ बीमारी एप्लास्टिक एनिमिया से पीडि़त छठी कक्षा की बालिका को नया जीवन मिला है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट से यह उपचार संभव हो सका है। 45 लाख रुपए के खर्च में होने वाला यह उपचार नि:शुल्क किया गया है। गुजरात में इस तरह का यह दूसरा मामला है।
जूनागढ़ जिले के केशोद निवासी मिरल एप्लास्टिक एनिमिया से पीडि़त थी। इस बीमारी में या तो शरीर में रक्त नहीं बनता या फिर रक्त बनने में अवरोध होता है। बालिका की इस बीमारी से पूरा परिवार चिंता में रहता था। इतना ही नहीं, बेटी को स्वस्थ करने के लिए मां ने सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी। बालिका के उपचार के लिए चिकित्सकों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी थी लेकिन इसके लिए लगभग 45 लाख रुपए का खर्च होना था। माता समेत पूरे परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना के तहत बोन मैरो ट्रांसप्लांट अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में नि:शुल्क किया गया। अब यह बालिका बिल्कुल स्वस्थ बताई गई है और अब वह हर रोज स्कूल जाती है।

कैंसर अस्पताल में भी लिया गया था उपचार

दुर्लभ बीमारी से जूझ रही पुत्री की देखरेख और उपचार कराने के लिए अपनी नौकरी छोड़ देने वाली माता का कहना है कि उनकी पुत्री जब चार वर्ष की थी तब एक बार उसे बुखार आया था। उसे तब अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहां रक्त की कमी बताई गई। शरीर में रक्त नहीं बन रहा था। उस दौरान एक चिकित्सक की सलाह पर बालिका को कैंसर अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। बालिका को एप्लास्टिक एनिमिया की पुष्टि हुई थी जो ब्लड कैंसर जैसे ही लक्षणों वाली बीमारी है। तब उसका उपचार कराया गया था लेकिन चार वर्ष बीतने के बाद फिर से बालिका को यही बीमारी उभर आई। जिसके बाद बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराना जरूरी हो गया।

यह है एप्लास्टिक एनीमिया

मानव शरीर में बोन मैरो अस्थिमज्जा से रक्त बनने का काम शुरु होता है। रक्त निर्माण की प्रक्रिया में स्टेमसेल से रक्त के मुख्य घटक आरबीसी, डब्ल्यूबीसी व प्लेटलेट्स का निर्माण होता है। शरीर में आरबीसी ताकत देती है, डब्ल्यूबीसी बीमारियों के खिलाफ लड़ती है। प्लेटलेट्स रक्त के बहाव को रोकता है। इस तरह रक्त के इन मुख्य घटकों के नहीं बनने के कारण ज्यादा थकान होती है, इन्फेक्शन होना जैसी गंभीर समस्या होती है। इस स्थिति में मरीज के शरीर में रहने वाले खराब कोशिका का कीमोथेरेपी से नष्ट किया जा सकता है। मरीज के साथ रक्त संबंध वाले बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाता है। मिरल के मामले में उसकी छोटी बहन के बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।

जल्द से बीमारी को पकडऩे पर बेहतर उपचार की गुंजाइश

एप्लास्टिक एनिमिया का निदान जल्द हो जाए तो उपचार के बेहतर होने की गुंजाइश होती है। इस बीमारी के लक्षण में शरीर पीला पडऩा जैसे कई लक्षण हैं। इस समस्या का अनुवांशिकी से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन यह काफी जटिल बीमारी है। जिसमें रक्त बनने की प्रक्रिया व्यवस्थित नहीं होती। ऐसे में मरीज को बार-बार संक्रमण लगने का खतरा बढ़ता रहता है जो घातक भी हो सकता है।

डॉ. अनिल खत्री, मैनेजिंग ट्रस्टी, थेलेसीमिया जागृति फाउंडेशन-गुजरात