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Gujarat: घोल मछली गुजरात की स्टेट फिश घोषित, महंगी गोल्ड फिश के कई गुण

घोल मछली को गुजरात स्टेट फिश घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने वर्ल्ड फ़िशरीज़ डे के अवसर पर मंगलवार को अहमदाबाद साइंस सिटी में आरंभ हुए पहले वैश्विक मत्स्य सम्मेलन (ग्लोबल फिशरीज कॉन्फ्रेंस इंडिया-2023) में इसकी घोषणा की। उन्होंने यह घोषणा केन्द्रीय मत्स्योद्योग मंत्री परषोत्तम रूपाला, केन्द्रीय मत्स्योद्योग राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालयान व डॉ. एल. मुरुगन तथा राज्य के कृषि एवं मत्स्योद्योग मंत्री राघवजी पटेल की उपस्थिति में की।

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Gujarat: घोल मछली गुजरात की स्टेट फिश घोषित,  महंगी गोल्ड फिश के कई गुण

Gujarat: घोल मछली गुजरात की स्टेट फिश घोषित, महंगी गोल्ड फिश के कई गुण

घोल मछली को गुजरात स्टेट फिश घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने वर्ल्ड फ़िशरीज़ डे के अवसर पर मंगलवार को अहमदाबाद साइंस सिटी में आरंभ हुए पहले वैश्विक मत्स्य सम्मेलन (ग्लोबल फिशरीज कॉन्फ्रेंस इंडिया-2023) में इसकी घोषणा की। उन्होंने यह घोषणा केन्द्रीय मत्स्योद्योग मंत्री परषोत्तम रूपाला, केन्द्रीय मत्स्योद्योग राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालयान व डॉ. एल. मुरुगन तथा राज्य के कृषि एवं मत्स्योद्योग मंत्री राघवजी पटेल की उपस्थिति में की।

सुनहरे-भूरे रंग की घोल मछली का वैज्ञानिक नाम प्रोटोनिबिया डायकैंथस है जिसे ब्लैकस्पॉटेड क्रॉकर भी कहा जाता है। घोल मछली को गोल्ड फिश भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम प्रोटोनिबिया डायकैंथस है जिसे अपवाद प्रजाति का माना जाता है। इसे सोने के दिल वाली मछली के रूप में भी जाना जाता है। इस प्रकार की मछली की प्रजाति गुजरात व महाराष्ट्र के तट पर पाई जाती है। भारत में पाई जाने वाली यह सबसे बड़ी मछली है।

यूपी, महाराष्ट्र में घोषित कर चुके हैं स्टेट फिश

इस अवसर पर केन्द्रीय मत्स्यपालन मंत्री परषोत्तम रूपाला ने कहा कि गुजरात ने घोल मछली को अपनी स्टेट फ़िश घोषित किया है। उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र सहित देशभर में विभिन्न राज्यों ने हाल के समय में अपनी स्टेट फ़िश घोषित की हैं जो सिद्ध करता है कि इस सेक्टर में देशभर में रुचि बढ़ी है।

कई तरह के पोषक तत्व

पूर्वी एशिया में पाई जाने वाली इस मछली में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं जिनमें आयोडीन, ओमेगा-3, डीएचए, ईपीए, आयरन, टॉरिन, मैग्नीशियम, फ्लोराइड व सेलेनियम शामिल हैं। घोल मछली का इस्तेमाल कई प्रकार की दवाइयों को बनाने में किया जाता है। इससे बनने वाली दवाइयों से कई रोगों का इलाज होता है। यह मछली प्राथमिक रूप से भारतीय-प्रशांत क्षेत्र में पाई जाती है जो स्वादिष्ट होती है।

औषधीय गुण भी

मछली के अंगों के औषधीय गुणों के कारण पूर्वी एशिया में इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। इसे सोने के दिल वाली मछली के रूप में भी जाना जाता है। यह मछली सामान्यता सिंगापुर, मलयेशिया, इंडोनेशिया, हॉन्ग-कॉन्ग और जापान में निर्यात की जाती है। इस मछली की स्किन में उच्च गुणवत्ता वाला कॉलेजन (मज्जा) पाया जाता है। इस कोलेजन को दवाओं के अलावा क्रियाशील आहार, कॉस्मेटिक उत्पादों को बनाने में प्रयोग किया जाता है। बीते कुछ वर्षों में इन सामग्री की वैश्विक मांग बढ़ रही है। मछली के पंखों को दवा बनाने वाली कंपनियां घुलनशील सिलाई और वाइन शुद्धि के लिए इस्तेमाल करती हैं।

सबसे महंगी मछली

इंडस्ट्री विशेषज्ञ के मुताबिक घोल फीश की एयर ब्लैडर की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक लाख प्रति किलोग्राम होती है।इन बाजारों में विशेष रूप से चीन, हांगकांग शामिल हैं जहां पर इसका उपयोग सूप बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। यह मछली सबसे महंगी मानी जाती है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से इन मछलियों का आवास समुद्री किनारे से अब गहरे समुद्र में शिफ्ट हो गया है।