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गुजरात में रात्रि स्कूल-कॉलेज शुरू करने की उठी मांग

बोर्ड सदस्य का प्रस्ताव, जीएसईबी की सामान्य सभा 12 को, महाराष्ट्र में रात में भी चलते हैं जूनियर कॉलेज

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गुजरात में रात्रि स्कूल-कॉलेज शुरू करने की उठी मांग

अहमदाबाद. गुजरात में दिन के समय नौकरी, धंधा, मजदूरी करने वाले लोगों को शिक्षा का अवसर मुहैया कराने के लिए रात्रि स्कूल और कॉलेज शुरू करने की मांग उठी है।
गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसईबी) के सदस्य डॉ. प्रियवदन कोराट ने 12 अक्टूबर को होने जा रही बोर्ड की सामान्य सभा में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक प्रस्ताव बोर्ड के समक्ष रखा है। इसमें उन्होंने रात के समय नौवीं से लेकर 12वीं कक्षा तक की रात्रि स्कूल शुरू करने की बोर्ड की ओर से मंजूरी दिए जाने की मांग की गई है। कोराट ने सौराष्ट्र विश्वविद्यालय में भी इससे जुड़ा प्रस्ताव रखने की तैयारी दर्शाई है।
प्रस्ताव में पड़ोसी प्रदेश महाराष्ट्र का भी हवाला दिया है, जहां पर रात्रि के समय श्रमिक, नौकरपेशा लोगों के लिए 11वीं-12वीं के जूनियर कॉलेज चलते हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी की ओर से रात के समय में कॉलेज भी चलाए जाते होने का उल्लेख किया है।
प्रियवदन कोराट की ओर से भेजे प्रस्ताव में कहा गया है कि गुजरात में अभी सुबह और दोपहर की पारी में स्कूलें संचालित होती हैं। रात के समय में स्कूल संचालित करने की मंजूरी देने का कोई प्रावधान ही नहीं है। इसके चलते जो विद्यार्थी, युवक, युवती, बच्चे-बुजुर्ग नियमित स्कूलों के समय के दौरान स्कूल नहीं जा पाते हैं। उन्हें शिक्षा का अवसर प्रदान करने के लिए रात के समय में नौवीं से लेकर 12वीं कक्षा तक की स्कूल शुरू करने की मंजूरी दी जाए। इसके लिए बोर्ड के स्कूल शुरू करने व संचालित करने और मंजूरी देने के नियमों में जरूरी संशोधन किया जाए। योग्य प्रस्ताव आने पर उसकी जांच पड़ताल करने के बाद ही जहां जरूरी दिखाई दे वहीं पर ही ऐसी रात्रि स्कूलों को मंजूरी देने की मांग उन्होंने की है।
मॉडल परीक्षा केन्द्र को चुनने की दे मंजूरी
डॉ. प्रियवदन कोराट ने दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थियों को मॉडल परीक्षा केन्द्र को चुनने का विकल्प देने की भी मांग की है। इससे जुड़ा प्रस्ताव भी बोर्ड के समक्ष रखा है, जिसमें कहा है कि राज्य में कई परीक्षा केन्द्रों को नकल के लिहाज से संवेदनशील घोषित किया जाता है, लेकिन उन पर मेधावी विद्यार्थी भी होते हैं। वह ऐसे माहौल से बिना वजह परेशान होते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को परीक्षा केन्द्र चुनने का मौका देने चाहिए। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक मॉडल परीक्षा केन्द्र बनाया जाए। जहां ऐसे परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठने देने का विकल्प पसंद करने का मौका दिया जाए। वैसे इससे पहले भी कोराट इससे जुड़ा एक प्रस्ताव पहले ला चुके हैं, जिसे बोर्ड की कारोबारी समिति की ओर से खारिज कर दिया गया था।