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खुशी की खबर: बढ़ रहा भारतीय भेडिय़ों का कुनबा

Gujarat, Indian grey wolf, sakkarbaug zoo, breeding centre, Gir, WPA Schedule-1 species, wild life -गिर के सक्करबाग जू ब्रीडिंग सेंटर में छह साल में जन्मे 40 बच्चे, संख्या हुई 50, लुप्त होने के कगार पर हैं भारतीय भेडिय़े

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खुशी की खबर: पिंजरे की कैद में भी बढ़ रहा भारतीय भेडिय़ों का कुनबा

खुशी की खबर: पिंजरे की कैद में भी बढ़ रहा भारतीय भेडिय़ों का कुनबा

नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. ‘जंगल बुक कार्टून’ के किरदार मोगली, उसकी पालक मां रक्षा (भेडिय़ा), शेरखान (बाघ) के बारे में तो आपने सुना, पढ़ा और देखा होगा। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि शेरखान का सामना कर कई बार मोगली को बचाने वाले उसके पालक माता-पिता यानि भेडिय़े भारत में लुप्त होने के कगार पर हैं। इस बीच एक अच्छी खबर आई है कि भेडिय़ों का कुनबा बढ़ रहा है।
यह सफलता एशियाई शेरों के लिए प्रख्यात गुजरात के गिर इलाके में जूनागढ़ स्थित सक्करबाग चिडिय़ाघर को मिली है। जहां वर्ष 2014-15 से केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण (सीजेडए) के साथ मिलकर भारतीय भेडिय़े (इंडियन ग्रे वुल्फ-कैनिस लूपस) का ब्रीडिंग सेंटर शुरू किया गया है। इंडियन वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अनुसूची-1(शिड्यूल्ड-1) में शामिल भारतीय भेडिय़ों की आबादी बढ़ाने की मेहनत दो साल में ही रंग लाने लगी।
इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वर्ष 1863 में स्थापित देश के पुराने जू में से एक सक्करबाग जू में बीते छह सालों में भेडिय़ों के 40 बच्चे जन्मे हैं। जिससे जू में भेडिय़़ों की कुल संख्या बढकऱ 50 हो गई है। 2014-15 में सक्करबाग जू में भेडिय़ों की संख्या केवल दो थी। तब यहां ब्रीडिंग सेंटर शुरू किया गया। वर्ष 2015-16 में एनीमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जयपुर, मैसूर और जोधपुर चिडिय़ाघर से छह और भेडिय़ों को लाया गया। ब्रीडिंग सेंटर के तहत की गई मेहनत के चलते वर्ष 2016-17 में पहली बार भेडिय़ों के तीन बच्चों का जन्म हुआ। उसके बाद से हर साल भेडिय़ों की आबादी बढ़ाने में इस सेंटर को सफलता मिल रही है। वर्ष 2017-18 में भी 3 बच्चे जन्मे। वर्ष 2018-19 में दो बच्चों का जन्म हुआ। सबसे ज्यादा 14 बच्चे वर्ष 2019-20 में जन्मे, वर्ष 2020-21 में सात बच्चों का जन्म हुआ। वर्ष 2021-22 में अब तक यानि 14 दिसंबर तक 11 बच्चों का जन्म हो चुका है। यानि ब्रीडिंग सेंटर शुरू हुआ तब से 40 बच्चे यहां जन्मे हैं।

जंगल में छोडऩे पर भी कर रहे विचार
सेंट्रल जू अथोरिटी (सीजेडए) के समन्वय से 2014-15 में सक्करबाग जू में भारतीय भेडिय़ों का ब्रीडिंग सेंटर शुरू किया है। सेंटर बनने के बाद से अब तक 40 बच्चे जन्मे हैं। इसमें से छह दिसंबर को ही छह बच्चे जन्मे हैं। 18 नवंबर को 5 बच्चों का जन्म हुआ था। जिससे जू में भेडिय़ों की संख्या रिकॉर्ड 50 पर पहुंच गई है। जो 2014-15 में महज 2 थी। हम जू में जन्मे भेडिय़ों को जंगल में छोडऩे पर भी विचार कर रहे हैं।
-डी.टी.वसावड़ा, मुख्य वन संरक्षक, गिर वाइल्डलाइफ क्षेत्र

जोड़ी बनाना बड़ी चुनौती, हो रहे सफल
भेडिय़ों का कुनबा बढ़ाने में सबसे बड़ी चुनौती इनकी जोड़ी बनाना है। मनुष्यों की तरह ही पुरुष भेडिय़ा जिस मादा को पसंद करता है उसके साथ ही रहना पसंद करता है। जब तक कि उस मादा की मौत ना हो जाए। जोड़ी बनाने को पिंजरे में अलग-अलग चार प्रकार के मचान, गुफाएं बनाई हैं। जोड़ी बनने के बाद प्रजननकाल के समय इन्हें एकांत देने से लेकर इनकी मैटिंग सफल होने के बाद मादा के गर्भधारण करने और फिर उसकी खुराक पर ध्यान दिया जाता है। दुरबीन, सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जाती है। बच्चों पर भी नजर रखते हैं।
-अभिषेक कुमार, निदेशक, सक्करबाग जू

आबादी बढऩा अच्छी बात
भारत के जंगलों में अक्सर दिखाई देने वाले भेडिय़े आज लुप्त हो रहे हैं। क्योंकि जंगली क्षेत्र कम हो रहे हैं। ऐसे में उनकी आबादी का बढऩा, वह भी ब्रीडिंग सेंटर में अच्छी बात है। सराहनीय है। ऐसे में अब जू में पले बढ़े इन भेडिय़ों को जंगल में छोड़ा जाना चाहिए ताकि जंगली इलाकों में भी ये जीवित रहें और इनकी आबादी बढ़े। गुजरात में वेरावदर, गिर इलाके में अभी भी भेडिय़े पाए जाते हैं।
-जुबिन आसरा, वन्यजीव प्रेमी, अहमदाबाद

ब्रीडिंग के लिए रखते हैं यह ध्यान
जू सूत्रों के अनुसार ब्रीडिंग सेंटर में भेडिय़ों के खानपान-उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। पिंजरे में बहुविध प्रकार की मचान, गुफाएं बनाई जाती हैं। सेनिटाइजेशन किया जाता है। जोड़ी बनाई जाती है। अलग-अलग मादा-पुरुष भेडिय़ों को साथ रखा जाता है। जोड़ी बनने पर साथ पिंजरे में रखते हैं। प्रजननकाल के समय मादा भेडिय़े के व्यवहार पर सीसीटीवी कैमरे, दुरबीन से नजर रखते हंै। समय आने पर मैटिंग के लिए एकांत देने को ग्रीन नेट लगाते हंै। सीसीटीवी के जरिए निगरानी रख मैटिंग सफल होने पर मादा-पुरुष भेडिय़ों को अलग रखते हैं। 10 दिन बाद मादा भेडिय़े के ब्लड सैंपल लेकर गर्भ की जांच की जाती है। पुष्टि होने पर मादा को विशेष खुराक दी जाती है। मादा के बच्चे को जन्म देने के लिए बहुविध प्रकार के प्राकृतिक व कृत्रिम गुफाएं बनाई जाती हैं। बच्चे के जन्म के 10 दिन बाद उन्हें गुफा से निकाल उनका वजन कर उनके वजन के अनुरूप खुराक दी जाती है।


सक्करबाग चिडिय़ाघर में यूं बढ़ी आबादी
वर्ष जन्मे बच्चे
2014-15 -0
2015-16 -0
2016-17 -3
2017-18 -3
2018-19 -2
2019-20 -14
2020-21 -7
2021-22 -11 (14 दिसंबर 21 तक)