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गुजरात में 486 फोटोग्राफ पर जारी हुए 29 हजार सिमकार्ड में से 16 हजार फर्जी

Gujarat police arrested 18 persons to issue fake sim card -डीओटी, सीआईडी क्राइम-साइबर सेल, गुजरात एटीएस की संयुक्त कार्रवाई-राज्यभर के 5 जिलों में 15 एफआईआर दर्ज, 18 आरोपी गिरफ्तार-30 मोबाइल सिमकार्ड विक्रेता चिन्हित, 7 हजार नकली सिमकार्ड बेचने का खुलासा, कई और मोबाइल सिमकार्ड विक्रेताओं पर गिरेगी गाज

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गुजरात में 486 फोटोग्राफ पर जारी हुए 29 हजार सिमकार्ड में से 16 हजार फर्जी

गुजरात में 486 फोटोग्राफ पर जारी हुए 29 हजार सिमकार्ड में से 16 हजार फर्जी

Ahmedabad. डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन (डीओटी) अहमदाबाद, सीआईडी क्राइम-साइबर सेल और गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की संयुक्त टीम ने फर्जी मोबाइल सिमकार्ड बेचने और उसे एक्टिव करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। संयुक्त टीम ने राज्य में 486 फोटोग्राफ का उपयोग कर लिए गए 29 हजार से ज्यादा मोबाइल सिमकार्ड में से एक्टिव 16 हजार सिमकार्ड फर्जी होने का खुलासा किया है।अब तक राज्य के पांच जिलों में दबिश देकर 18 आरोपियों को पकड़ा है। 15 एफआईआर दर्ज की हैं। इन पांच जिलों में 30 मोबाइल सिमकार्ड विक्रेताओं की ओर से करीब सात हजार फर्जी मोबाइल सिमकार्ड बेचने और उन्हें एक्टिव करने का खुलासा हुआ है। सबसे ज्यादा चार-चार एफआईआर सूरत और नवसारी जिले में दर्ज की गई हैं। अहमदाबाद और भावनगर जिले में तीन-तीन और राजकोट जिले में एक एफआईआर दर्ज की है।

इन आरोपियों को पकड़ा

अहमदाबाद शहर मेें अमन बीयरवाला, जयमिन परमार, राहुल और जयमिन ठक्कर को पकड़ा है। अहमदाबाद में 12 मोबाइल सिम विक्रेताओं ने फर्जी सिम बेचे। सूरत शहर में सागर पाटिल, दीक्षित गजेरा, प्रदीप रामावत, सूरत ग्राम्य में सकलेन शेख, सरफराज मिर्जा, आलोक पटेल, दीपसंग पटेल को पकड़ा है। सूरत शहर में 13 और सूरत ग्राम्य में एक मोबाइल सिम विक्रेता के यहां से फर्जी सिम जारी हुए। भावनगर में घनश्याम वाजा, राजकोट ग्राम्य में हरेश सांकलिया, नवसारी में हितेश देवनानी, अभिषेक पांडे, जयकुमार टंडेल को पकड़ा है।

एआई-फेशियल रिकग्निशन तकनीक की ली मदद

डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम (डीओटी) ने फर्जी मोबाइल सिमकार्ड को पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और फेस रिकग्निशन पावर्ड सोल्यूशन (एएसटीआर) तकनीक की मदद ली है। इसमें एक समान फोटो, नाम व पते पर जारी सिमकार्ड का ब्यौरा पता लगता है। गुजरात लाइसेंस सेवा प्राप्त क्षेत्र (एलएसए) के डेटाबेज में इस तकनीक की मदद से 486 फोटो को चिन्हित किया। जिन पर 29552 मोबाइल सिमकार्ड जारी किए गए थे। इसमें से 16 हजार सिम फर्जी और एक्टिव पाए गए।

पसंदीदा नंबर चाहने वालों के फोटो का दुरुपयोग

जांच में पता चला कि जो व्यक्ति पसंदीदा मोबाइल नंबर पाने के लिए आवेदन करते थे। उनके फोटो व दस्तावेजों का मोबाइल सिमकार्ड विक्रेताओं ने दुरुपयोग किया है। फर्जी सिमकार्ड जारी कर उन्हें एक्टिव किया है।

क्रिकेट सट्टा, साइबर क्राइम, ऑनलाइन ठगी में उपयोग

मोबाइल फोन विक्रेताओं की ओर से जारी किए गए इन फर्जी सिमकार्ड का उपयोग क्रिकेट सट्टे से जुड़े लोगों, साइबर क्राइम, ऑनलाइन ठग गिरोह की ओर से किए जाने की आशंका है। इस बारे में जांच जारी है। कुछ और लोगों विरुद्ध एफआईआर की तैयारी की जा रही है।

पत्रिका अलर्ट-बातों का रखें ध्यान

सीआईडी क्राइम साइबर सेल के तहत सिमकार्ड खरीदते समय दुकानदार को आधारकार्ड की प्रतिलिपि या फोटो देने की जगह सिर्फ आधारकार्ड नंबर बताएं। दुकान से मिले सिमकार्ड को दुकानदार से एक्टिव ना करवाकर खुद अपने मोबाइल फोन में एक्टिव करें। कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म के लिए एक बार ही फोटो खींचने दें। दुबारा फोटो खींचने का बोले तो सुनिश्चित करें कि पहले वाला फोटो उपयोग में न लिया गया हो।

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