
कोरोना महामारी ने हमें पढ़ाए कई पाठ : जस्टिस शाह
अहमदाबाद. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एम आर शाह ने कहा कि सफलता घर में बैठे नहीं मिलती। यह ईमानदारी और कठिन परिश्रम से मिलती है। इसलिए कठिन परिश्रम करते रहें। वे शनिवार को आयोजित गुजरात विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षांत समारोह को मुख्य वक्ता पद से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे खुद कठिन परिश्रम का उदाहरण हैं। वे हर दिन 16 घंटे काम करते थे और हर सप्ताहांत तहसीलों व जिलों में जाते थे।
जस्टिस शाह ने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबोमा के 'यस आई केनÓ स्लोगन का उल्लेख करते हुए कहा कि जिंदगी अनिश्चितताओं से भरी है। लेकिन यह भी याद रखें कि हर रात के बाद सवेरा होता है। इसलिए 'हां, मैं कर सकता हूंÓ का भाव रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वे आज भी छात्र हैं। विद्यार्थियों से कहा कि ऐसा नहीं सोचें कि मने बधू आवडे छे (यानी मुझे सब कुछ आता है)। कोरोना काल के लॉकडाउन के समय उन्होंने कंप्यूटर को सीखा, जिसका नतीजा है कि आज वह पेपरलैस काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के साल ने हमें कई पाठ पढ़ाए हैं। लोगों ने मानवता का अनुभव किया। परिवार के लोग एक दूसरे के और करीब आए। सेवा व मानवता का महत्व समझा। हमें देश, समाज और पड़ोसियों की सेवा करनी चाहिए।
न्यायाधीश शाह ने कहा कि वे इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और इसी विवि के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि हैं। इससे बड़ा कोई अहोभाग्य नहीं हो सकता है। उन्होंंने कहा कि उन्हें इस विवि का छात्र व गुजराती होने पर गर्व है।
दीक्षांत समारोह में 56 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। 151 विद्यार्थियों को 275 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इस मौके पर उपकुलपति डॉ. जगदीश भावसार, कुलसचिव डॉ पी एम पटेल एवं प्राध्यापक तथा छात्र-छात्राएं एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।
अध्ययन जारी रखें: राज्यपाल
राज्यपाल एवं विवि के कुलाधिपति आचार्य देवव्रत ने कहा कि विद्यार्थियों को डिग्री लेने के बाद भी अपने अध्ययन को जारी रखना चाहिए। ऐसा भाव नहीं रखें कि अब तक खूब पढ़े और अब किताबों को आलमारी में रखकर ताला लगाना है। अध्ययन जारी रखना है। ऐसा करने से ज्ञान बढ़ता है। उन्होंने जीयू में 250 स्टार्टअप के गतिमान होने को सराहा।
मेहनत का मिलता है फल: शर्मा
प्रधान शिक्षा सचिव अंजू शर्मा ने भी कहा सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। इसका एक ही मार्ग है कठिन परिश्रम। मेहनत करते रहें, इसका फल जरूर मिलता है भले देर से ही मिले।
खुद की क्षमताओं को समझने की जरूरत: कुलपति
जीयू कुलपति प्रो.हिमांशु पंड्या ने कहा कि हमें खुद के अंदर छिपी क्षमताओं को समझने की जरूरत है। जब ऐसा होगा तो हमें रोजगार के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। कोरोना वायरस ने हमारी सीमाएं हमें बता दीं। यह भी बता दिया कि काफी कुछ करना अभी बाकी है।
Published on:
13 Mar 2021 11:23 pm
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