
गुजरात प्रदेश कांग्रेस कार्यालय।
Ahmedabad गुजरात की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रदेश कांग्रेस की ओर से गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की रिपोर्ट हाउसहोल्ड सोशल कंजम्पशन : हेल्थ का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात में ग्रामीण और शहरी मरीजों के इलाज के खर्च में भारी असमानता है।
इससे साफ होता है कि गांव और शहरों व्यवस्थाएं अनुकूल नहीं है। सरकारी अस्पतालों पर भरोसा भी कम हो रहा है। रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि ग्रामीण मरीज अस्पताल में भर्ती होने पर औसतन 28,516 रुपए खर्च करते हैं, जबकि शहरी मरीजों को 53,747 रुपए तक खर्च करना पड़ता है यानी लगभग दोगुना बोझ है
।गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. पार्थिवराजसिंह कठवाड़िया ने मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में केवल 28.2 प्रतिशत मरीज सरकारी अस्पतालों में जाते हैं, जबकि 59.5 फीसदी निजी अस्पतालों में भर्ती होते हैं। शहरी क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 69.5 फीसदी मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं और सरकारी अस्पतालों पर भरोसा घटकर 23.5 फीसदी रह गया है।
रिपोर्ट के हवाले से कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि प्रसव के मामलों की भी यही तस्वीर सामने आई। ग्रामीण क्षेत्र में 42.5 बच्चों का जन्म सरकारी अस्पतालों में होता है, जबकि 51.5 फीसदी का निजी अस्पतालों में जन्म होता है। शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा और अधिक है, जहां 63.5 फीसदी बच्चों का जन्म निजी अस्पतालों में होता है। खर्च की बात करें तो सरकारी अस्पताल में प्रसव का खर्च ग्रामीण क्षेत्र में केवल 832 रुपए और शहरी क्षेत्र में 1460 रुपए है, जबकि निजी अस्पतालों में यह खर्च क्रमशः 25,717 रुपए और 34,414 रुपए तक पहुंच जाता है।
कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि राज्य में सुविधाओं के अभाव और डॉक्टरों की कमी के कारण मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है और साबित करती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास तेजी से घट रहा है। इससंबंध में कांग्रेस ने मांग की है कि अनुकूल व्यवस्थाएं की जाएं ताकि सरकारी अस्पतालों को लेकर विश्वास बना रहे।
Published on:
19 May 2026 10:37 pm
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