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विफलता ही सफलता का मूल आधार, रातों-रात नहीं मिलेंगे परिणाम: सचिन तेंदुलकर

-अहमदाबाद आए मास्टर ब्लास्टर ने युवा खिलाडि़यों में भरा जोश, परिजनों से कहा, दबाव न डालें, आत्मविश्वास बढ़ाएं, जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करने की कला भी सिखाएं, हमेशा रन बनाना संभव नहीं

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Sachin Tendulkar

अहमदाबाद में युवा खिलाड़ियों को संबोधित करते सचिन तेंदुलकर।

Ahmedabad. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि विफलता से नहीं घबराएं, वही सफलता का मूल आधार है। हमें यह बात अच्छी तरीके से समझनी होगी कि रातों-रात सफलता नहीं मिलेगी। इसके लिए मेहनत करनी होगी। जरूरी है कि हम बच्चों को स्वतंत्रता दें, उन्हें प्रोत्साहित करें और उन पर दबाव नहीं डालें। अनुशासन में रहकर निरंतर तैयारी करनी जरूरी है। वे मंगलवार को अहमदाबाद के गोता स्थित एसआरटी10 एल्टेवॉल स्पोर्ट्स अकादमी में युवाओं से मुलाकात करने पहुंचे थे।

तेंदुलकर ने परिजनों से कहा कि मैंने जब 11 साल में शुरूआत की तो मेरे परिजनों ने मुझ पर कभी भी दबाव नहीं डाला। न ही सवाल पूछा कि रन क्यों नहीं बन रहे। शुरूआत के दो मैच में मैंने शून्य रन बनाए, तीसरे में एक रन बनाया। उसमें भी नजरिया ऐसा रखा कि कम से कम मैंने एक रन तो बनाया।

उन्होंने कहा कि हर बार आप रन नहीं बना सकते। फोकस जरूरी है इसलिए प्रैक्टिस नहीं छोड़ें। हर बार तैयारी कर जरूर जाना चाहिए। सफलता की गारंटी नहीं होती है। टैलेंट भगवान की देन है, लेकिन तैयारी और अनुशासन आपके हाथ में है। उन्होंने कहा कि मैंने बहुत सारे प्रतिभावान क्रिकेटर देखे हैं, लेकिन वह सफल नहीं है। सफलता के लिए आपको कई चीजों का त्याग करना पड़ेगा।

शॉर्टकट न अपनाएं, जरूरी है जुनून

उन्होंने युवा खिलाडि़यों से कहा कि यदि आपको भारत के लिए खेलना है, तो यह शॉर्टकट से संभव नही है। शॉर्टकट से दुनिया के सामने एक्सपोज होने का खतरा रहता है। तेंदुलकर ने कहा कि क्रिकेट हो या अन्य कोई खेल सभी के लिए आपके अंदर जुनून का होना बहुत जरूरी है। स्पर्धाओं में भाग लेना होगा और लगातार सीखना होगा। सबसे अहम यह है कि आपका इरादा क्या है जो अहम है। हर बार अपेक्षा के परिणाम नहीं मिलेंगे। विफलता और सफलता के दिनों को पचाना भी सिखाएं। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। ऐसे में दोनों ही परिस्थितियों का सामना करना आना चाहिए। परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव ना बनाएं, बल्कि उन्हें उनके स्वाभाविक खेल को खेलने दें और उसमें कोई सुधार हो तो उसे करने का सुझाव दें। बच्चों का मनोबल बढ़ाएं। उन्हें और अच्छा करने के लिए प्रेरित करें। विफलता का सामना करना सिखाएं।

भारत को खेलने वाला देश बनाना है

उन्होंने कहा कि वे मानते हैं कि भारत खेल को पसंद करने वाला और प्यार करने वाला देश है। इसे हमें खेलों को खेलने वाले देश में परिवर्तित करना है। इस समय भारत में खेलों को लेकर अच्छा माहौल है।