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IITGandhinagar: हाइड्रोजन को स्टोर करने वाले स्वदेशी नैनो मटीरियल को खोजा

IIT Gandhinagar discover Indigenous nano material to store hydrogen आईआईटी गांधीनगर की अहम शोध, अमरीका की दो लैब में भी जाकर किए गए संबंधित प्रयोग, -पेट्रोल-डीजल, सीएनजी के बढ़ते दामों का बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन  

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IITGandhinagar: हाइड्रोजन को स्टोर करने वाले स्वदेशी नैनो मटीरियल को खोजा

IITGandhinagar: हाइड्रोजन को स्टोर करने वाले स्वदेशी नैनो मटीरियल को खोजा

Ahmedabad. पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों और आए दिन बढ़ रहे सीएनजी के दाम के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-गांधीनगर से एक अच्छी खबर सामने आई है। आईआईटी गांधीनगर की छात्रा हरिणी गुंदा ने प्रोफेसर कबीर जसूजा के मार्गदर्शन में एक ऐसा स्वदेशी नैनो मटीरियल तैयार किया है, जिसमें हाइड्रोजन को स्टोर करने की क्षमता है। ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है।
बोरोन लेयर के बीच मैग्नीशियम वाला एक सेन्डविच के आकार वाले इस नैनो मटीरियल को एक्सबीन्स भी कहते हैं।
आईआईटी गांधीनगर में इस मटीरियल की खोज करने के बाद अमरीका की सेन्डिया नेशनल लैब और लॉरेन्स लिवरमूर नेशनल लैब में पीएचडी छात्रा हरिणी गुंदा ने जरूरी प्रयोग किए।
अमरीका की इन लैब में जाकर एक सेमेस्टर तक इससे जुड़ा अध्ययन व इस पर शोध की। इस शोध को स्मॉल पत्रिका ने प्रकाशित किया है।

एक किलो हाइड्रोजन में 96 किमी चल सकती है गाड़ी
आईआईटी गांधीनगर केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रो.कबीर जसूजा ने बताया कि हाइड्रोजन एक ग्रीन फ्यूल है। एक किलोग्राम हाइड्रोजन ईंधन से 96 किलोमीटर तक गाड़ी चला सकते हैं। इससे कार्बन का उत्सर्जन नहीं होता है, जिससे प्रदूषण भी नहीं होगा और वातावरण में गर्मी भी नहीं बढ़ेगी। प्रो. जसूजा बताते हैं कि यह शोध इसलिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाइड्रोजन का उत्पादन तो आसान है, लेकिन इसको स्टोर करना काफी मुश्किल है। कई वैज्ञानिक इसे स्टोर करने में सक्षम मटीरियल तैयार करने में जुटे हैं।

50 गुना बढ़ जाती है हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता
प्रो.जसूजा बताते हैं कि टीम ने अध्ययन में यह पाया कि इस एक्सबीन्स परिवार के मैग्नीशियम डायबोराइड की नैनो स्केलिंग करने पर इसकी हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता 50 गुना तक बढ़ जाती है। जिससे इसके बाजार में आने पर एक ईंधन के रूप में बेहतर विकल्प बनकर उभरने में काफी आसानी होगी। उन्होंने बताया कि हाइड्रोजन स्टोर करने के लिए करीब 700 एटमोस्फेयर प्रेशर देना पड़ता है। यह काफी ज्यादा है। जिससे हाइड्रोजन की कीमत बढ़ जाती है। शोध के दौरान हमारी टीम कम प्रेशर में भी हाइड्रोजन को स्टोर करने पर काम कर रही है।

बॉल मिलिंग तकनीक से उत्पादन में वृद्धि
प्रो.जसूजा ने बताया कि शोध के दौरान लैब में 10 मिलीग्राम नैनो मटीरियल बनाने में एक सप्ताह का समय लगता था। ज्यादातर शोध यहीं पर दम तोड़ देते हैं और वे बाजार में नहीं आ पाते क्योंकि उनका उत्पादन बड़े पैमाने पर संभव नहीं होता है। इस चिंता को भी हमने काफी गंभीरता से लिया और इस पर भी काम किया। हमें खुशी है कि हाई एनर्जी बॉल मिलिंग तकनीक के जरिए टीम ने एक दिन में ही एक ग्राम यह नैनो मटीरियल बनाने में सफलता पाई है। इसकी शोध के लिए ज्यादातर लैब ने 10 ग्राम मटीरियल की जरूरत जताई थी, जिससे शुरुआत में छह महीने तक काम करके इसे तैयार किया फिर अमरीका में जाकर इस पर शोध की थी।

हाइड्रोजन स्टोर से होंगे ये फायदे
-इससे हाइड्रोजन को ज्यादा पैदा कर उसे स्टोर किया जा सकेगा।
-यह ग्रीन ईंधन के रूप में तेजी से उभर रहा है।
-इससे वाहन चलाने पर प्रदूषण नहीं होता है।
-इसके उत्पादन का प्रमुख सोर्स पानी है। जो बहुतायत उपलब्ध है।
-हाइड्रोजन ईंधन पर आधारित इंजन भी कई ऑटोमोबाइल कंपनियां बना रही हैं। उन्हें बल मिलेगा।
-केन्द्र सरकार भी ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन को बढ़ावा दे रही है।
-1 किलो हाइड्रोजन ईंधन से 96 किमी तक वाहन चला सकते हैं।
-देश अभी 16 लाख करोड़ के फॉसिल फ्यूल का आयात करता है।
-जैव ईंधन और ग्रीन हाइड्रोजन से ईंधन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की राह आसान होगी।
-महाराष्ट्र सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति घोषित की है।