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गुजरात में पिछले कुछ वर्षों से हृदय रोग संबंधित मामलों में तेजी से वृद्धि हो रहीहै। ऐसा नहीं है कि शहरी इलाकों में बल्कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों व ग्रामीण इलाकों में और ज्यादा मामले सामने आए हैं। गुजरात में वर्ष 2023-24 के मुकाबले 2024-25 में औसतन 16.81 प्रतिशत हृदय संबंधित इमरजेंसी बढ़ी हैं। गुजरात इमरजेंसी 108 एम्बुलेंस के जन संपर्क अधिकारी विकास बिहानी के अनुसार वर्ष 2023-24 में राज्य में 75390 इमरजेंसी दर्ज हुई थी। जबकि वर्ष 2024-25 में ये संख्या बढ़कर 88065 हो गई जो 16.81 फीसदी अधिक है। राज्य में आबादी के लिहाज से सबसे बड़े अहमदाबाद जिले में 22038 की तुलना में यह संख्या 25855 तक पहुंच गई जो 17.32 फीसदी अधिक है। इस समयावधि में सबसे अधिक 27 फीसदी इमरजेंसी डांग जिले में पाई गई। दाहोद में यह 25.85, पोरबंदर में 24.49, सूरत में 23.75 तथा अमरेली जिले में 20.23 फीसदी अधिक इमरजेंसी सामने आईं हैं।
इमरजेंसी 108 एंबुलेंस ने वर्ष 2024 के अप्रेल माह के 21 दिनों की तुलना में इस वर्ष अप्रेल माह के 21 दिनों में नर्मदा जिले में सबसे अधिक 47.30 फीसदी अधिक इमरजेंसी संभाली हैं। पिछले वर्ष (अप्रेल माह के 21 दिनों में ) नर्मदा जिले में 39 इमरजेंसी की तुलना में इस वर्ष 74 दर्ज हुई है। इसी तरह से पाटण में भी 46.81, पंचमहाल में 43.06, गांधीनगर में 36.36, बनासकांठा में 31.08, भावनगर में 29.90, वडोदरा में 26.36, वलसाड में 24.18, दाहोद में 21.25 फीसदी हृदय संबंधित इमरजेंसी सामने आईं हैं।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रवीण गर्ग के अनुसार हृदय रोग संबंधित मरीजों का सबसे बड़ा कारण जीवनशैली व खान-पान में बदलाव है। शारीरिक परिश्रम में कमी के बीच लोगों में जंकफूड का चलन बढ़ा है। लोगों को व्यायाम, योग, फलों व हरी सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। समय पर शारीरिक जांच भी जरूरी है। मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा सतर्कता रखने की जरूरत है।
Published on:
22 Apr 2025 10:21 pm
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