
Ahmedabad: साबरमती जेल के कैदियों ने 7 साल में 4500 ऑडियो बुक को दी आवाज
Ahmedabad. साबरमती जेल की चारदीवारी में किसी न किसी अपराध की सजा काट रहे कैदियों की आवाज कई नेत्रहीनों के लिए उनकी जिंदगी को संवारने के काम आ रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जेल के ये कैदी नेत्रहीन लोगों के लिए किताबों को अपनी आवाज में रिकॉर्ड करते हैं। जिससे किताब में दी गई जानकारी, ज्ञान को आवाज के जरिए नेत्रहीन लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 7 साल पहले हुई थी। अब तक 4500 किताबों को साबरमती जेल के कैदी अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर चुके हैं। जिससे गुजरात ही नहीं बल्कि देश-विदेश के नेत्रहीन व्यक्ति भी लाभान्वित हो रहे हैं। साबरमती जेल में कैदियों की ओर से यह कार्य दो अक्टूबर 2016 से किया जा रहा है। नेत्रहीन लोगों के लिए किताबों को ऑडियो के रूप में उपलब्ध कराने का सुझाव वर्ष 2012 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री व मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद स्थित अंधजन मंडल (बीपीए) में ब्रेल पुस्तक के विमोचन समारोह के दौरान दिया था। उन्होंने ही इस कार्य के लिए जेल में बंद कैदियों की मदद लेने का भी सुझाव दिया था जिससे जहां नेत्रहीन लोगों को आधुनिक तकनीक की मदद से ब्रेल लिपि वाली पुस्तक की जगह ऑडियो बुक मिल सके और कैदियों को भी जेल के अंदर कुछ रचनात्मक, ज्ञानवर्धक किताबें, साहित्य पढ़ने का मौका मिल सके, जिससे दोनों का लाभ हो।
अंधजन मंडल के उप निदेशक भरत जोशी ने बताया कि तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी के सुझाव पर अंधजन मंडल के महासचिव डॉ.भूषण पुनानी ने साबरमती जेल प्रशासन के साथ मिलकर दो अक्टूबर 2016 से साबरमती जेल में प्रोजेक्ट प्रतिध्वनि के तहत कैदियों की आवाज में नेत्रहीनों के लिए किताबों को रिकॉर्ड करने की शुरुआत की। जेल में स्थित गांधीयार्ड में कैदी रिकॉर्डिंग करते हैं। तब से लेकर अब तक सात सालों में 4500 ऑडियो किताबों को कैदियों की आवाज में रिकॉर्ड किया जा चुका है। यह कार्य जारी है।
गुजराती के साथ हिंदी, अंग्रेजी में भी होती है रिकॉर्डिंग
अंधजन मंडल के उप निदेशक जोशी के तहत साबरमती जेल में बंद कैदियों में कई पढ़े लिखे कैदी भी हैं। जेल में गुजराती के साथ हिंदी और अंग्रेजी भाषा में भी ऑडियो बुक को रिकॉर्ड किया जाता है। जेल में कैदी ऑडियो रिकॉर्ड करते हैं फिर उसे एडिट कर ऑडियो बुक के रूप में बीपीए की ओर से अपनी वेबसाइट और भारत सरकार के सुगम्य पुस्तकालय में उपलब्ध कराया जाता है। जहां से इसे नि:शुल्क डाउनलोड कर अब तक 1000 नेत्रहीनों ने इसका लाभ लिया है।
भुज-पालरा जेल की प्रदर्शनी में प्रतिध्वनि का निदर्शन
कच्छ जिले के भुज में स्थित पालरा जेल में हाल ही में आयोजित प्रदर्शनी में बीपीए के उप निदेशक की ओर से प्रतिध्वनि प्रोजेक्ट का निदर्शन किया। कैदियों को इसकी जानकारी दी।
Published on:
22 Aug 2023 10:40 pm
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