12 नवम्बर 2007 को इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी (रोसकोसमोस) के प्रतिनिधियों ने चंद्रयान-2 परियोजना पर साथ काम करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। ऑर्बिटर तथा रोवर की मुख्य जिम्मेदारी इसरो ने अपने जिम्मे ली थी जबकि रोसकोसमोस लैंडर तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। भारत सरकार ने 18 सितंबर, 2008 को पीएम मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस अभियान को स्वीकृति दी थी। अंतरिक्ष यान के डिजाइन को अगस्त, 2009 में पूर्ण कर लिया गया, जिसमे दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने अपना संयुक्त योगदान दिया था। तय योजना के अनुसान इसरो ने चंद्रयान -2 पेलोड को अंतिम रूप दिया। परंतु अभियान को जनवरी, 2013 में स्थगित कर दिया गया तथा अभियान को 2016 के लिये पुनर्निर्धारित किया। ऐसा इसलिए किया गया कि रूस लैंडर को समय पर विकसित नहीं कर सका। रोसकोसमोस को बाद में मंगल ग्रह के लिए भेज़े फोबोस-ग्रन्ट अभियान मे मिली विफलता के कारण चंद्रयान -2 से अलग कर दिया गया। उसके बाद भारत ने चंद्र मिशन टू को स्वतंत्र रूप से विकसित करने का फैसला किया।