
केंद्रीय विद्यालय के 16 वर्षीय छात्र ने बनाई विद्युत चालित साइकिल
गांधीनगर. कोरोना महामारी में लॉकडाउन में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कुछ न कुछ नया किया है। ऐसे ही अहमदाबाद में शाहीबाग की केंद्रीय विद्यालय के 11वीं कक्षा के छात्र हैं 16 वर्षीय श्रेयस चतुर्वेदी, जिन्होंने बैट्रीचलित साइकिल तैयार की गई है। उन्होंने स्कूल जाने के लिए अपनी पुरानी साइकिल को बैट्री चलित साइकिल में परिवर्तित कर दिया।
बाजार में उपलब्ध बैट्री चलित आम स्कूटरों की बैट्री डिस्चार्ज होने पर उनको चार्ज करने के बाद ही चला सकते हैं। यदि स्टेंड बाय बैट्री रखी जाय तो उसकी लागत बढ़ जाती हैं। जो बैट्री चलित साइकिल मार्केट में उपलब्ध हैं, उनकी बिना पैडल घुमाए चलने की क्षमता कम होती है।
गुजरात सरकार की इलेक्ट्रोनिक व्हीकल की प्रोत्साहित योजना से प्रेरित श्रेयस ने अपनी साइकिल को बैट्री चलित साइकिल में परिवर्तित करने की योजना बनायी थी। कोरोना काल का सदुपयोग कर अपनी पुरानी साइकिल पर प्रयोग करना शुरू किया। साइकिल आसानी से बन गई लेकिन साइकिल तथा मोटर की चेन का एलाइनमेंट सेट करना चुनौतीभरा हो गया था। इसके लिए मोटर की जगह कई बार बदलनी पड़ी।
साइकिल में 250 वाट की मोटर तथा 2४ वॉल्ट, 20 एम्पीयर की लिथियम आयन बैटरी लगाई है, जिससे इसे आसानी से बिना पेडल का उपयोग किए 25 किलोमीटर की अधिकतम स्पीड पर लगभग एक घंटा 45 मिनट तक चलाया जा सकता हैं । साइकिल पर पेडल का उपयोग कर अधिकतम सुरक्षित स्पीड 30 किलोमीटर तक प्राप्त की जा सकती हैं। खास बात यह हैं कि बैट्री डिस्चार्ज होने पर इसे आम साइकिल की तरह भी चलाया जा सकता हैं। इसे परिवर्तित करने की लागत लगभग 15000 रुपए हुई। वही यदि नई साइकिल में लगाना हो तो इसमें नई साइकिल की लागत लगभग रु 5000 और बढ़ जाएगी। मास लेवल पर उत्पादन कर इसकी लागत को कम किया जा सकता हैं।
श्रेयस बताते हैं कि फिलहाल ये साइकिल स्कूल जाने के लिए बनाई है। आगामी समय में साइकिल में और भी बदलाव किए जाएंगे। श्रेयस पिता एवं रेलवे अधिकारी संजय चतुर्वेदी ने अपने बेटे की इस उपलब्धि को लेकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह साइकिल बनाने में बेटे को हर संभव मदद की है। पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधनों की बढ़ती दरों में ये साइकिल काफी कारगर बनेगी।
Published on:
29 Nov 2021 10:15 pm
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