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किडनी अस्पताल में सैकड़ों अनजान लोगों के बीच बन गए खून से भी मजबूत रिश्ते

अहमदाबाद के किडनी अस्पताल ने किए 446 स्वैप ट्रान्सप्लान्ट  

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किडनी अस्पताल में सैकड़ों अनजान लोगों के बीच बन गए खून से भी मजबूत रिश्ते

किडनी अस्पताल में सैकड़ों अनजान लोगों के बीच बन गए खून से भी मजबूत रिश्ते

अहमदाबाद. शहर के सिविल अस्पताल परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिसिज एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) अर्थात किडनी अस्पताल में दूर दूर से आए सैकड़ों अनजन लोगों के बीच खून से भी मजबूत रिश्ते बन गए। अस्पताल की ओर से ऐसे 446 किडनी ट्रान्सप्लान्ट किए गए जिनमें दानदाता अपने नहीं बल्कि दूसरे थे। किडनी दानदाता और मरीज के बीच अस्पताल ने मैच मेकर का काम किया है।
किडनी ट्रान्सप्लान्ट के लिए दूर-दूर से आने वाले मरीजों को उस दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है जब उनके रक्त का मैचिंग अपनों से मेल नहीं खाती। ऐसे में अस्पताल की ओर से स्वैप ट्रान्सप्लान्ट की व्यवस्था की जाती है। जिसमें अन्य मरीजों के परिजनों की किडनी से आदानप्रदान किया जाता है। इसमें दाता और मरीजों की जोड़ी का मिलान किया जाता है। इस तरह से कभी कभी साथ दस-दस लोगों के किडनी ट्रान्सप्लान्ट किए गए हैं।
पिछले सप्ताहं चार मरीजों का ट्रान्सप्लान्ट भी स्वैप के आधार पर किया गया। जिसमें जिसमें मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तथा तमिलनाडू और राजस्थान के परिवारों के बीच अनूठा रिश्ता बन गया। हाल ही मेें राजस्थान और गुजरात के दो परिवारों के बीच भी इस तरह का रिश्ता बना। दरअसल अलग अलग राज्यों के इन छह परिवारों के मरीजों की किडनी एक दूसरे के परिजनों ने एक दूसरे को दी। इसका कारण इनकी मैचिंग अपनों से नहीं हो सकी थी। अस्पताल में एसे एक दो नहीं बल्कि अब तक 446 ट्रान्सप्लान्ट कर दिए गए हैं। मेच मेकिंग सॉफ्टवेयर से यह संभव हो रहा है।

देश में सबसे अधिक करते हैं स्वैप ट्रान्सप्लान्ट
देश में सबसे अधिक स्वैप किडनी ट्रान्सप्लान्ट आईकेडीआरसी में किए जाते हैं। विविध राज्यों की अन्य बड़ी संस्थाओं में प्रतिवर्ष 10 से 12 लोगों के स्वैप ट्रान्सप्लान्ट किए जाते हैं। जबकि आईकेडीआरसी में प्रतिवर्ष 50 से 60 स्वैप ट्रान्सप्लान्ट किए जाते हैं। अब तक संस्था में इस तरह से 446 ट्रान्सप्लान्ट किए हैं। स्वैप ट्रान्सप्लान्ट उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है जिनके अपनों के अंग काम नहीं आ रहे हैं। ऐसे मरीजों का ग्रुप बनाकर उनके परिजनों और मरीजों के नमूनों का मिलना किया जाता है। इसके बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया और मरीज और परिजनों की सहमति से एक दूसरे के ट्रान्सप्लान्ट किए जाते हैं।

विनीत मिश्रा, निदेशक आईकेडीआरसी अहमदाबाद