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द्वारका में 800 बीघा भूमि पर खेला गया महारास

महारास स्थल नंदधाम परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को किया विराजमान अहीर समाज ने जगत मंदिर पर किया ध्वजारोहण

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द्वारका में 800 बीघा भूमि पर खेला गया महारास

अहीर समाज ने जगत मंदिर पर किया ध्वजारोहण

जामनगर. देवभूमि द्वारका जिले के द्वारका में अहिरानियों के महारास स्थल नागेश्वर रोड पर रुक्मणि मंदिर के समीप मुलु कंदोरिया की भूमि पर अहिरानी महारास का आयोजन किया गया। इस स्थल का नाम नंदधाम परिसर है, यह 800 बीघा भूमि पर है।

महारास का उत्सव शनिवार से शुरू हुआ। शनिवार सुबह महारास स्थल नंदधाम परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को विराजमान किया गया। इसके बाद महारास वाले स्थान से द्वारका में भगवान द्वारकाधीश के जगत मंदिर तक अहीर समाज की ओेर से रैली के रूप में मंदिर पहुंचकर शिखर पर ध्वजा चढ़ाई गई। रविवार को महारास के दौरान सांसद पूनम माडम भी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर शामिल हुईं। इस अवसर पर मंदिर को रोशनी से सजाया गया।

उपवास और मौन व्रत

उपवास और मौन व्रत रखकर 37 हजार से ज्यादा महिलाएं रास खेलने आईं। महिलाओं ने स्वयं मौन व्रत और उपवास रखकर महारास रचाया। महारास का यह आयोजन दो घंटे से अधिक समय तक चला, तब तक महिलाओं ने स्वयं मौन व्रत और उपवास रखा। पूरे कार्यक्रम के समापन के बाद महिलाओं एवं स्वयंसेवकों ने शांति यात्रा का आयोजन किया। महिलाएं कार्यक्रम स्थल से द्वारकाधीश मंदिर गईं, जहां विश्व शांति के लिए प्रार्थना की गई।

विदेश से भी पहुंची महिलाएंरविवार को भगवान श्रीकृष्ण के यादव वंश की 37000 अहिरानियों के महारास का विश्व रिकॉर्ड बना। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और दुबई आदि देश की अहिरानियां महारास खेलने के लिए आज द्वारका आईं। लोककथाओं के अनुसार लगभग 550 साल पहले भगवान श्रीकृष्ण, कच्छ के व्रजवाणी में अहिरानियों के साथ रास खेलने आए थे। उन्हीं की स्मृति में यह महारास आयोजित किया गया।

16,108 के लक्ष्य के मुकाबले 37,000 ने पंजीकरण कराया

अहिरानी महारास के आयोजन में सोशल मीडिया के जरिए प्रारंभ में जामनगर, देवभूमि द्वारका और जूनागढ़ जिलों की 56 बहनों ने पंजीकरण करवाया। बाद में अखिल भारतीय अहिरानी महारास नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया। अखिल भारतीय अहिरानी महारास एसोसिएशन ने द्वारका में 16,108 अहिरानियों का महारास आयोजित करने का निर्णय लिया और गुजरात के सभी जिलों को जोड़ने का काम शुरू किया। जिले को जोड़ने के लिए प्रत्येक जिले के व्हाट्सएप समूह बनाए गए और प्रत्येक जिले के गांव की अहिरानी बहनों को महारास से जोड़ने के लिए प्रत्येक तहसील का एक-एक समूह बनाया। धीरे-धीरे गुजरात के 24 जिलों व अन्य राज्यों की 37,000 बहनों ने महारास के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया।

बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए

इस भव्य आयोजन में पर्यटन मंत्री मुलु बेरा, सांसद पूनम माडम, विधायक भगवान बारड, त्रिकम छांगा, प्रदेश भाजपा मंत्री रघु हुंबल, सहित बड़ी संख्या में अहीर समुदाय और अन्य समुदाय के लोग उपस्थित थे।

महारास से एक रात पहले बेडा रास खेला

महारास से पूर्व रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। जिसमें मालदे आहीर के लिखित नाटक श्रीकृष्ण की लीलाएं का मंचन किया गया। इसके बाद सबीबेन अहीर द्वारा व्रजवाणी रास की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर कच्छ की अहिरानियों ने बेडा रास प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के समापन के बाद मायाभाई आहीर और अहीर समुदाय के कलाकारों ने डायरे में प्रस्तुति दी।

जगत मंदिर को रोशनी से सजाया

महारास के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय महारास संघ की ओर से संपूर्ण द्वारका जगत मंदिर को रोशनी से सजाया गया। मंदिर के प्रवेश द्वार से लेकर रास्ते तक रोशनी की गई।

स्वयंसेवकों को पान खाने, सिगरेट पीने की अनुमति नहीं

सेवा के दौरान महाप्रसाद या अन्य स्वयंसेवकों में किसी भी प्रकार के पान या सिगरेट, तम्बाकू का सेवन करना वर्जित था। साथ ही कूड़ा इधर-उधर न फेंकने की भी हिदायत दी गई। सफाई रखने का भी विशेष निर्देश दिए गए। सफाई के लिए 100 लोगों की अलग से टीम बनाई गई।

अहीर समाज ने जगत मंदिर पर किया ध्वजारोहण

जगत मंदिर को रोशनी से सजाया

महारास के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय महारास संघ की ओर से संपूर्ण द्वारका जगत मंदिर को रोशनी से सजाया गया। मंदिर के प्रवेश द्वार से लेकर रास्ते तक रोशनी की गई।

महारास से एक रात पहले बेडा रास खेला

महारास से पूर्व रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। जिसमें मालदे आहीर के लिखित नाटक श्रीकृष्ण की लीलाएं का मंचन किया गया। इसके बाद सबीबेन अहीर द्वारा व्रजवाणी रास की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर कच्छ की अहिरानियों ने बेडा रास प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के समापन के बाद मायाभाई आहीर और अहीर समुदाय के कलाकारों ने डायरे में प्रस्तुति दी।

महारास स्थल नंदधाम परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को किया विराजमान

सांसद पूनम माडम भी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर शामिल हुईं