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पिछले पांच वर्षों में 1052 लोगों के किडनी में कैंसर के उपचार के दौरान महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या दुगने से अधिक पाई गई। इस अवधि में महिलाओं में किडनी कैंसर के 310 केस सामने आए थे वहीं पुरुषों में यह संख्या 742 तक पहुंच गई। यह जानकारी शहर के सिविल मेडिसिटी परिसर के गुजरात कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआई) में सामने आई।
जीसीआरआई में किडनी कैंसर के उपचार की सभी स्टेज में सफलता दर लगभग 78 फीसदी रही है। यदि समय रहते यह रोग पकड़ा जाए तो इसके सफल उपचार की दर और वृद्धि संभव है। देश में चीन, अमेरिका और रूस के बाद सबसे अधिक किडनी कैंसर के मामले हैं। भारत में एक वर्ष में (ग्लोबोकैन 2022 के तहत) 17480 नए किडनी कैंसर के मामले दर्ज हुए थे।
जीसीआरआई के निदेशक डॉ. शशांक पंड्या के अनुसार किडनी कैंसर का कोई एक विशिष्ट कारण नहीं है, लेकिन कई ऐसे कारक हैं जिनसे किडनी में कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। इनमें सबसे पहला तंबाकू का सेवन, मोटापा, उच्च रक्तचाप, क्रोनिक किडनी रोग, लंबे समय तक डायलिसिस पर रहना शामिल है। साथ ही किडनी कैंसर का अनुवांशिक कारण, एस्बेस्टस, कैडमियम, बेंजीन और ट्राइक्लोरोइथिलीन जैसे रसायनों का संपर्क भी इसका कारण है।
डॉ. पंड्या के अनुसार किडनी कैंसर एक ऐसी समस्या है जिसके शुरुआत में स्पष्ट लक्षण की कमी होती है। ऐसे में इसका पता देरी से चलता है। हालांकि सोनोग्राफी या फिर सीटी स्कैन के जरिए शुरुआती ट्यूमर का पता लग सकता है। ऐसे में रोबोटिक नेफरेक्टोमी जैसी सर्जरी से उपचार हो सकता है।
अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आनंद शाह के अनुसार मूत्र में रक्त जाना, पेट या बगल में गांठ महसूस होना, पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना, भूख में कमी, शरीर में बुखार रहना, अचानक वजन में कमी होना, थकान, रक्त की कमी होना, लगातार ब्लड प्रेशर, रात में पसीना आना, पैरों व टखनों में सूजन आना भी इसके लक्षणों हो सकते हैं।
Published on:
08 Jul 2025 10:58 pm
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