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सत्ता, जमीन और सौदेबाज़ी: 1500 करोड़ के घोटाले में पूर्व कलेक्टर ED के शिकंजे में

ED Arrest: यह कार्रवाई 23 दिसंबर 2025 को की गई छापेमारी के बाद हुई, जब ईडी ने तत्कालीन सुरेंद्रनगर कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर रेड की थी।

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Former collector of Surendranagar in Gujarat arrested

गुजरात में सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर अरेस्ट

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के पूर्व कलेक्टर राजेंद्र पटेल को 1500 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले मामले में गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को ईडी की तीन टीमों ने गांधीनगर स्थित उनके आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद लंबी पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई सुरेंद्रनगर जिले में एनए (नॉन-एग्रीकल्चर) भूमि रूपांतरण से जुड़ी कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच का हिस्सा है।

एसीबी ने दर्ज किया भ्रष्टाचार का मामला

यह कार्रवाई 23 दिसंबर 2025 को की गई छापेमारी के बाद हुई, जब ईडी ने तत्कालीन सुरेंद्रनगर कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर रेड की थी। उसी दिन ईडी के एक अधिकारी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), सुरेंद्रनगर में राजेंद्र पटेल, उप मामलतदार चंद्रसिंह मोरी, कलेक्ट्रेट क्लर्क मयूर गोहिल और कलेक्टर के निजी सहायक जयराजसिंह ज़ाला के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। इन घटनाओं के बाद राजेंद्र पटेल का तबादला कर दिया गया था।

1 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप

एसीबी की शिकायत के अनुसार, डिप्टी मामलतदार चंद्रसिंह मोरी पर आरोप है कि उसने तत्कालीन कलेक्टर, उनके क्लर्क और निजी सहायक की जानकारी व मिलीभगत से कुल 1 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। जांच एजेंसियों का दावा है कि उन्हें ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें इस पूरे रैकेट में शामिल बिचौलियों और उन्हें दिए गए भुगतान का विवरण दर्ज है।

छापेमारी में 67.50 लाख रुपये जब्त

23 दिसंबर को सुरेंद्रनगर जिले में मोरी के आवास पर छापेमारी के दौरान ईडी ने 67.50 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। यह राशि एक बेडरूम से बरामद की गई थी और इसे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत जब्त किया गया।

मोरी ने कबूला जुर्म

पीएमएलए के तहत दर्ज अपने बयान में चंद्रसिंह मोरी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि जब्त की गई नकदी रिश्वत की रकम थी, जो एनए भूमि रूपांतरण के लिए त्वरित या अनुकूल मंजूरी दिलाने के बदले आवेदकों से सीधे या बिचौलियों के जरिए वसूली गई थी।