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महादान: तीन दिन में तीन अंगदान से 11 लोगों को मिला जीवनदान

-अहमदाबाद सिविल अस्पताल में ब्रेनडेड मरीजों के परिजनों ने पेश की मिसाल, दंताणी समाज की ओर से पहला अंगदान

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Civil hospital

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में अंगदान करने वाले मरीज के परिजन एवं चिकित्सक।

Ahmedabad. अहमदाबाद सिविल अस्पताल में तीन दिनों में तीन ब्रेनडेड मरीजों के अंगों का दान मिला है। इससे 11 मरीजों को जीवनदान मिला है। ब्रेनडेड मरीजों के परिजनों ने साहस दिखाते हुए अंगदान का निर्णय किया। एक मृतक महिला के परिजनों ने त्वचा का भी दान किया। इन चार घटनाओं से 10 अंग और एक त्वचा प्राप्त हुई।

पहला मामला गांधीनगर के 50 वर्षीय बहरानभाई पंडित का था। ब्रेनडेड घोषित होने के बाद उनकी पत्नी संगीताबेन ने उनके लिवर और दोनों किडनी दान करने का निर्णय लिया, जिससे तीन मरीजों को नई जिंदगी मिली। वह मजदूरी का काम करते थे।दूसरा मामला 42 वर्षीय एक अन्य मरीज का था, जिनके परिवार ने गुप्त अंगदान करते हुए लिवर, हृदय और दोनों किडनी का दान देने की स्वीकृति दी, जिससे चार लोगों को जीवनदान मिला।

दंताणी समाज के पहले ब्रेनडेड व्यक्ति के अंगों का दान

तीसरे मामले में ब्रेनडेड घोषित किए गए नारोल के 45 वर्षीय रिक्शा चालक पूरणभाई दंताणी के परिवार ने उनके लिवर और उनकी दोनों किडनी दान कर इतिहास रचा। यह दंताणी समाज का पहला अंगदान था।

ब्रेनडेड महिला के पति ने किया पत्नी की त्वचा का दान

अंगदान महादान की इस श्रृंखला में त्वचा दान भी शामिल है। मणिनगर के एक निजी अस्पताल प्रेरित होकर मृतक अंजनाबेन पटेल के पति ने पत्नी की त्वचा दान की, जो भविष्य में गंभीर रूप से घायल या झुलसे मरीजों के लिए वरदान साबित होगी।

विशेष बात यह रही कि 19 अप्रेल को, विश्व लीवर दिवस के दिन ही सिविल अस्पताल ने 237वें ब्रेनडेड मरीज के अंगदान का आंकड़ा पार किया। अब तक यहां कुल 237 ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान से 784 अंग और 237 पेशियां प्राप्त हुई हैं। इनमें 211 लिवर, 437 किडनी, 75 हृदय और 34 फेफड़े शामिल हैं।

सिविल अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकार और समाजसेवी संस्थाओं के प्रयासों से समाज में अंगदान की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। जब कोई परिवार अपने प्रियजन की मृत्यु के दुख में भी दूसरों को जीवन देने का निर्णय करता है, तो यह केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं रहती, बल्कि मानवता का सर्वोच्च उत्सव बन जाती है। इन दाता परिवारों की उदारता और अस्पताल की टीम की मेहनत से ही ‘अंगदान महादान’ की पहल सार्थक हो रही है।