
संवाददाताओं को संबोधित करते मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल। साथ हैं केन्द्रीय राज्यमंत्री रक्षा खडसे और गुजरात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा।
Ahmedabad. केन्द्र सरकार की ओर से लोकसभा, विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित नहीं होने के चलते गुजरात में भी सियासत गरमा गई है।
ऐसा इसलिए है, क्योंकि रविवार को भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही इस बिल को लेकर एक दूसरे पर निशाना साधा। भाजपा ने जहां कांग्रेस पर महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में उठाए गए ऐतिहासिक कदम में रोड़ा डालने का आरोप लगाया वहीं कांग्रेस ने इसे सीमांकन और जनगणना बिना इसे लागू करने का प्रयास बताया।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय कमलम में आयोजित संवादादाता सम्मेलन में कहा कि इस बिल के जरिए मातृशक्ति का सम्मान, गौरव बढ़ाने और सशक्तीकरण का एक अवसर मिला था। पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इसके लिए विशेष सत्र भी बुलाया था, लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन की महिला विरोधी मानसिकता के चलते यह अहम बिल पारित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने बिल में रोड़े डालने का बड़ा पाप किया है। यह कोई राजनीतिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय निर्णय था। महिला शक्ति चुनाव में इसका जवाब देगी।
केन्द्रीय खेल एवं युवा मामलों की राज्यमंत्री रक्षा खडसे ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं को लोकसभा, विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए यह बिल लेकर आई थी,लेकिन कांग्रेस व उनके सहयोगी दलों ने इसके मार्ग को रोक दिया। लेकिन मोदी सरकार अपने प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने प्रियंका गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में वह राजनीति कर रही हैं। मोदी सरकार सिर्फ बयान नहीं देती महिलाओं के विकास, उत्थान, सशक्तीकरण के लिए काम भी कर रही है। गुजरात और महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है।
कमलम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने कहा कि 17 अप्रेल का दिन महिलाओं के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक बन सकता था, लेकिन कांग्रेस ने इसे विफल कर दिया। कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। उनके अधिकारों को दबाया है। जबकि भाजपा का मानना है कि महिलाओं को समान अधिकार और अवसर मिलना चाहिए।
रविवार को पालडी स्थित गुजरात प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी सदस्य व पूर्व सांसद डॉ.अमी याज्ञिक ने बिल के पारित न होने के पीछे भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि मोदी सरकार की नीयत साफ होती तो महिला आरक्षण विधेयक तत्काल लागू हो सकता था, लेकिन सरकार ने सीमांकन और जनगणना जैसी अटपटी शर्तें रखकर बिल को उलझाने और उसका अमल टालने का काम किया है। यह केवल महिलाओं के अधिकार पर प्रहार नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के साथ राजकीय अन्याय के समान है। अहमदाबाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष सोनल पटेल ने कहा कि कांग्रेस ने तो आजादी के प्रारंभिक दौर में ही महिलाओं को मताधिकार देने का क्रांतिकारीकदम उठाया था। राजीव गांधी सरकार ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया। 2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को कांग्रेस ने बिना किसी शर्त के समर्थन दिया था, लेकिन सरकार इसे लागू नहीं करना चाहती। यदि ऐसा नहीं होता तो 17 अप्रेल को लाए गए बिल में अटपटी शर्तें न लगाती।
Published on:
19 Apr 2026 10:25 pm
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