
वटवा में तोड़े गए आवासों के निकट एकत्र लोग।
अहमदाबाद शहर के वटवा इलाके में गरीब आवास योजना (ईडब्ल्यूएस) के नाम से वर्ष 2011 में तैयार किए गए ज्यादातर मकान उपयोग किए बिना ही मलबे में तब्दील हो गए हैं। यहां के नागरिकों का तो यहां तक कहना है कि गत छह माह से इन मकानों को तोड़ने का काम चल रहा है। 182 करोड़ के खर्च से तैयार किए गए 514 मकानों में से कुछ ही बचे हैं, जिन्हें तोड़ने के लिए मनपा का हथौड़ा अभी भी चल रहा है।
वटवा रेलवे स्टेशन पर ये चार मालिया के नाम से आवास बने हैं, उस जगह की मुलाकात के लिए शुक्रवार को महानगरपालिका के विपक्ष के नेता पहुंचे और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।मनपा में विपक्ष के नेता शहजादखान पठान का कहना है कि पिछले करीब पांच से छह माह से ही मनपा की ओर से इन मकानों की स्ट्रेक्चर स्टेबिलिटी रिपोर्ट नेगेटिव आने के नाम से इन्हें तोड़ना भी शुरू कर दिया है। 11 वर्ष पूर्व बने मकानों को किसी को भी आवंटित नहीं किया गया, मतलब बनाने के बाद तोड़ा जा रहा है। उन्होंने गरीबों के लिए बनाए गए इन आवासों में भारी भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया।
विपक्ष के नेता का कहना है कि इन मकानों में भ्रष्टाचार होने की आशंका है। इसकी निष्पक्ष जांच कराने के लिए मामले को सीबीआई को सौंपना चाहिए, ताकि दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि यहां 500 से ज्यादा मकान हैं। बहुत ही हल्की क्वालिटी का मटेरियल इस्तेमाल किए जाने से यह मकान कुछ ही वर्षों में जर्जरित हो गए।
वटवा में बने गरीब आवास योजना के ज्यादातर मकान चार मालिया के नाम से जाने जाते हैं। 514 मकानों को जिस जगह पर तोड़ा जा रहा है, उसके बगले में भी 209 आवास बने हैं। इन आवासों के नीचे गंदगी और दूषित पानी की भरमार है, जिससे लोग काफी परेशान हैं। यहां गंदगी से काफी परेशानी होती है। साथ ही नीचे भरे दूषित पानी के कारण भी बहुत दिक्कत हो रही है।
-राकेश मारवाड़ी, स्थानीय नागरिक
वटवा में रेलवे की लाइन के निकट गरीब आवास योजना के मकानों में उस दौरान कंपन्न होता है, जब यहां होकर ट्रेन गुजरती है। मकान बनाने में हल्की क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किए जाने से ऐसा होता है। बाहर निकले सरियों में जंग लगी हुई है। लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं
-श्माम डबगर, स्थानीय निवासी
चारों तरफ कीचड़, गंदगी के कारण आने जाने में भी परेशानी हो रही है। लोगों को पेयजल की सुविधा भी ठीक से नहीं मिल रही है। ऐसे में यहां के निवासी काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्हें जो मकान मिला है वह भी ऐसा लगता है मानों काफी पुराना हो गया है।
-विजय डबगर, स्थानीय निवासी
Published on:
20 Sept 2024 11:17 pm
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