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सावन का सत्कार : नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में भगवान शिव की करीब 25 मीटर ऊंची मूर्ति करती है यात्रियों को आकर्षित

अहमदाबाद. गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में द्वारका और बेट द्वारका के बीच स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यहां भगवान शिव की करीब 25 मीटर ऊंची मूर्ति है। यहां दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन फिर भी आज तक मंदिर के आस-पास यात्रियों के ठहरने एवं खाने-पीने की सुविधा नहीं विकसित की गई है। यात्रियों की मांग है कि यहां पर जरूरी यात्री व्यवस्थाएं विकसित की जाएं।
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अहमदाबाद

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Rajesh Bhatnagar

•

Updated: 9 Aug 2026, 10:54 PM IST

A towering ~25-meter statue of Lord Shiva at the Nageshwar Jyotirlinga temple complex draws visitors.

नागेश्वर मंदिर

अहमदाबाद. गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में द्वारका और बेट द्वारका के बीच स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यहां भगवान शिव की करीब 25 मीटर ऊंची मूर्ति है। यहां दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन फिर भी आज तक मंदिर के आस-पास यात्रियों के ठहरने एवं खाने-पीने की सुविधा नहीं विकसित की गई है। यात्रियों की मांग है कि यहां पर जरूरी यात्री व्यवस्थाएं विकसित की जाएं।

दारुकावन से जुड़ी है कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नागेश्वर क्षेत्र को प्राचीन समय में दारुकावन नाम से जाना जाता था। एक पौराणिक कथा के अनुसार, यहीं पर दारुका नामक एक राक्षस ने शिव भक्त सुप्रिया को कैद कर लिया था। सुप्रिया द्वारा 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करने से भगवान शिव क्रोधित हुए और उन्होंने यहां आकर राक्षस का वध किया। यहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसकी आज भी पूजा की जाती है।

बालखिल्य ऋषियों से भी जुड़ी है पौराणिक कथा

नागेश्वर से जुड़ी एक अन्य कथा में बालखिल्य ऋषियों का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि ऋषियों ने दारुकावन में लंबे समय तक भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव उनके सामने एक तपस्वी के रूप में प्रकट हुए। इस दौरान ऋषियों ने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया। मान्यता के अनुसार शिवलिंग पृथ्वी पर गिरने से तीनों लोकों में कंपन होने लगा। बाद में भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने भगवान शिव से पृथ्वी को विनाश से बचाने का अनुरोध किया। भगवान शिव ने अपना दिव्य स्वरूप धारण किया और दारुकावन में ज्योतिर्लिंग के रूप में सदैव विराजमान रहने का वरदान दिया।

शिवलिंग का स्वरूप त्रिमुखी रुद्राक्ष सरीखा

नागेश्वर मंदिर अपनी धार्मिक आस्था के साथ विशाल शिव प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भगृह में स्वयंभू माने जाने वाले शिवलिंग की पूजा की जाती है। शिवलिंग का स्वरूप त्रिमुखी रुद्राक्ष सरीखा बताया जाता है। मंदिर के आस-पास उद्यान और तालाब श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। नागेश्वर का अर्थ 'नागों के स्वामी' के रूप में माना जाता है। यहां भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है।

भगवान कृष्ण से भी जुड़ी है मान्यता

मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने यहां भगवान शिव की पूजा की थी और रुद्राभिषेक किया था। यहां पास में गोपी तालाब तीर्थ भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसे भगवान कृष्ण तथा गोपियों से जुड़ी पौराणिक कथाओं से जोड़ा जाता है।

महाशिवरात्रि, नाग पंचमी पर उमड़ते हैं श्रद्धालु

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि और नाग पंचमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इन अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।

अभी भी हैं कई समस्याएं

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, लेकिन यहां आने वाले श्रद्धालुओं को करीब 25 किलोमीटर दूर द्वारका शहर में होटलों-धर्मशालाओं में ठहरना और भोजन करना पड़ता है। यहां केवल गोपी चंदन, खिलौने, चाय-नाश्ते की सामग्री उपलब्ध होती है। इनके दाम भी अधिक वसूले जाते हैं। मंदिर की कोई वेबसाइट भी नहीं है। केवल देवभूमि द्वारका जिला प्रशासन और गुजरात के पर्यटन निगम की वेबसाइट पर मंदिर के बारे में जानकारी है।

मंदिर का हुआ है पुनर्निर्माण

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का पुनर्निर्माण भी हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 1996 में गुलशन कुमार ने एक चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर के पुनर्निर्माण और विकास का कार्य कराया था।