
जामनगर. दुष्कर्म के बाद नौ वर्षीय बालिका की हत्या के मामले में गिरफ्तार मृतका के सौतेले पिता व बहन को अदालत ने शनिवार को चार दिन के रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है। दूसरी ओर, पुलिस ने आरोपी पिता को क्षेत्र में घुमाया और रि-कंस्ट्रक्शन किया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने आरोपी के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त किया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि वह मृतका को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताडि़त करते थे। इतना ही नहीं, अपितु बालिका को नग्न करके नचाया और वीडियो उतारा। वीडियो को मृतका की माता को भेजा गया था। पुलिस जांच कर रही है कि विकास गृह में रहने वाली बालिका को आरोपियों ने किस प्रकार कब्जे में लिया और इसमें कितने संलिप्त हैं।
जानकारी के अनुसार बालिका की शंकास्पद मौत के मामले में मृतका के सौतेले पिता व बहन की भी संलिप्तता उजागर होने से पुलिस ने शुक्रवार दोनों को गिरफ्तार कर लिया और रिमांड के लिए शनिवार को अदालत में पेश किया।
प्रताडऩा से परेशान होकर मृतका की माता चली गई थी :
प्रारंभिक जांच के अनुसार मृतका की माता आरोपियों की प्रताडऩा से परेशान होकर घर छोड़कर कर्नाटक चली गई थी। विवाह के दौरान आरोपियों के मकान के दस्तावेजों में वारिसदार के रूप में मृतका की माता का नाम था, जिसके कारण आरोपी मकान को नहीं बेच सकता था। ऐसे में मृतका की माता को लाने के लिए दो महीने पूर्व सौतेले पिता, पुत्र व बहन ने षड्यंत्र रचा था। नौ वर्षीय बालिका को प्रताडि़त करते रहे और दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी थी।
विकास गृह से घर ले गया बालिका को
मृतका की माता बालिका को पढ़ाई के लिए विकास गृह में छोड़ गई थी, लेकिन अक्टूबर महीने में आरोपी बालिका को विकास गृह से घर ले गया और पढ़ाई भी छुड़वा दी। इसके बाद बालिका को प्रताडि़त करने लगा, जिसमें आरोपी के पुत्र व पुत्री ने भी साथ दिया। प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार आरोपी के कहने पर ही उसके पुत्र ने किशोरी से दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी।
लोगों ने लगाए हाय-हाय के नारे
दूसरी ओर, सबूत एकत्रित करने के लिए पुलिस शनिवार को आरोपी सौतेले पिता को लेकर क्षेत्र में पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने 'हाय-हायÓ के नारे लगाते हुए आरोपी के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त किया।
वकीलों ने किया केस नहीं लडऩे का प्रस्ताव
उधर, जामनगर बार एसोसिएशन की ओर से इस मामला का केस नहीं लडऩे का प्रस्ताव पारित किया गया है। राजकोट बार एसोसिएशन की ओर से भी केस नहीं लडऩे का प्रस्ताव पारित किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार समाज के हित में व मानवता को ध्यान में रखते हुए आरोपियों का केस कोई वकील नहीं लड़ेगा।
Published on:
17 Feb 2018 11:15 pm
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