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राष्ट्र निर्माण की शुरुआत गुजरात से हुई : पूर्व सीजेआई गोगोई

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राष्ट्र निर्माण की शुरुआत गुजरात से हुई : पूर्व सीजेआई गोगोई

राष्ट्र निर्माण की शुरुआत गुजरात से हुई : पूर्व सीजेआई गोगोई

गांधीनगर. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने कहा है कि देखा जाए तो राष्ट्र निर्माण का प्रारंभ गुजरात से ही हुआ है। देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल जो बड़े दूरदर्शी थे, उन्होंने 500 रजवाड़ों को एकजुट कर राष्ट्र का निर्माण किया। रजवाड़ों से भारतीय संघ बनाने में सरदार पटेल का अहम योगदान रहा है, लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि देश आजाद होने के तीन वर्षों बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। यदि वे दस वर्ष और जीवित रहते तो भारत की बात ही कुछ अलग होती। पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोगोई सोमवार को गांधीनगर स्थित गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) में 'न्याय व्यवस्था का पुनर्निर्माण-राष्ट्र निर्माणÓ पर आयोजित परिसंवाद को संबोधित कर रहे थे।

कई पैमानों में भारत काफी पीछे
उन्होंने कहा कि यदि हम आंकड़ों के हिसाब से तुलना करें तो एक राष्ट्र के तौर पर देखा जाए तो भारत की स्थिति अच्छी नहीं है। हम आबादी के हिसाब से तो दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण पैमानों में हम काफी पीछे हैं। खुशी का इण्डेक्स देखा जाए तो दुनिया के 156 देशों में से भारत 140वें स्थान पर है। यदि जन्म को लेकर बात की जाए तो दुनिया के 80 देशों में से भारत 66वें स्थान पर हैं, जहां वे जन्म लेना चाहेंगे। एयर क्ववालिटी इंडेक्स में 92 देशों में से भारत 84 स्थान पर हैं। डेमोक्रेसी की रैकिंग में 112 में से 65वें स्थान पर हैं। प्रेस स्वतंत्रता का इंडेक्स देखा जाए तो 180 देशों में से भारत 140वें स्थान पर हैं।

न्याय व्यवस्था का पुनर्निर्माण जरूरी
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का पुनर्निर्माण करना बहुत जरूरी है। जब तक कि न्याय व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तब तक देेश समृद्ध नहीं हो सकता। सिर्फ अदालतों की संख्या बढ़ाने या ज्युडिशियल (जजों) की नियुक्तियां करने से कुछ नहीं होगा। यह समय हमें निर्भीक, स्वतंत्रत और न्यायिक व्यवस्था के लिए कार्य करने का है। फिर देश आगे बढ़ेगा।

5 ट्रिलियन इकॉनोमी के लिए विदेशी निवेश की जरूरत

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनोमी बनाना चाहते हैं। यदि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉंमी का सपना पूरा करना चाहते हैं तो हमें विदेशी निवेश की आवश्यकता है, लेकिन हमें इसके लिए विवादों का निपटारा करने के लिए समाधान सिस्टम बनाना होगा। 90 फीसदी से ज्यादा न्यायाधीशों को वाणिज्यिक विवादों को निपटाने में लगाना होगा। हमें निवेशकों में विश्वास जगाना होगा कि हमारे यहां कार्य करने का बेहतर सिस्टम हैं।
उन्होंने कहा कि नेशनल डिफेंस एकेडमी की तरह ही नेशनल लॉ स्कूल है जिसमें कक्षा दसवीं के बाद छात्र इस स्कूल से जुड़ सकते हैं। न्यायिक व्यवस्था में भी करियर बनाया जा सकता है।

सीएए का संवैधानिक तरीके से हो समाधान

नगारिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर चल रहे विवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सीएए एक मुद्दा है। हमारे विचार नहीं मिल सकते, लेकिन संवैधानिक तरीके से इसका समाधान होना चाहिए। आपके न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखना चाहिए जिसमें भारतीय संविधान के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।
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