
New tongue made from thigh meat
अहमदाबाद।यहां शाहीबाग स्थित राजस्थान हॉस्पिटल में बालोतरा की जीभ कैंसर पीडि़ता 55 वर्षीया महिला के गले से दो गांठों व कैंसरग्रसित 50 प्रतिशत जीभ को निकालकर जांघ के मांस से नई जीभ बनाकर माइक्रो वेस्कुलर प्लास्टिक सर्जरी कर सफलतापूर्वक लगाई गई। राजस्थान के बाडमेर जिले में स्थित बालोतरा के ही निवासी डॉ. कल्पेश छाजेड़ ने और उनकी टीम में शामिल डॉ. ज्ञानेन्द्र मिश्रा, डॉ. गुन्जन, डॉ. अंकित शाह ने यह सर्जरी की।
डॉ. छाजेड़ ने कोलकाता में डॉ. एस.के. सैयद इस्लाम के अधीन एडवांस माइक्रो वास्कुलर सर्जरी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे यहां राजस्थान हॉस्पिटल में पिछले डेढ़ वर्ष से ओरल ओन्को सर्जन के तौर पर कार्यरत हैं। ओरल ओन्को सर्जन डॉ. छाजेड़ ने बताया कि 4 नवम्बर को हॉस्पिटल पहुंची 55 वर्षीया महिला शमीम बानो 4 महीनों पहले गांव में बायोप्सी करवाने के बाद उनसे मिली। यहां सीटी स्केन और एमआरआई सहित अन्य जांचें करवाई गई। रिपोर्ट से पता लगा कि महिला 50 प्रतिशत जीभ के कैंसर से पीडि़त थी। महिला पिछले छह महीनों से खाने और बोलने में कठिनाई महसूस कर रही थीं। गुटखे व तंबाकू का सेवन करने वाली महिला को जीभ के कैंसर का निदान करीब चार महीने पहले बालोतरा में हो चुका था।
हालांकि समय पर सर्जरी के बजाय वैकल्पिक उपचार करवाया और लाभ ना होने पर यहां रेफर किया गया।
दस गुना पतले धागे से जोड़ी जीभ :
इस कार्य में कपड़े सिलने वाले धागे के 10वें भाग सरीखे पतले धागे का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद महिला के गले से होठ तक टांके लगाए गए। डॉ. छाजेड़ ने बताया कि इस सर्जरी का कुल खर्चा किसी बड़े हॉस्पिटल में 4 से 7 लाख रुपए तक होता है, लेकिन राजस्थान हॉस्पिटल के सहयोग और उन्होंने अपनी टीम के योगदान से मात्र एक लाख 70 हजार रुपए में यह सर्जरी की। जांघ से मांस काटकर जीभ बनाकर लगाने का सबसे बड़ा फायदा है कि एडवांस माइक्रो सर्जरी के बाद पीडि़त कुछ ही समय में बोलने और खाने पीने लगते हैं। उन्होंने बताया कि माइक्रो वास्कुलर प्लास्टिक सर्जरी जटिल व महंगी होने के कारण देश के बहुत कम हॉस्पिटल में होती है।
तंबाखू ना खएं, लापरवाही ना बरतें :
हॉस्पिटल से छुट्टी दिए जाने से पहले, महिला ने बताया कि उनकी माता को भी मुंह का कैंसर था। वह स्वयं भी करीब 6 महीनों से पीडि़त थी। यहां पहुंचने तक जीभ का कैंसर चौथे चरण में पहुंच गया था और उन्हें 50 प्रतिशत जीभ कटवानी पड़ी। उनका कहना है कि वैकल्पिक उपचार करवाने के बजाय लापरवाही ना बरतकर समय पर सर्जरी के लिए तैयार होती तो इतना जटिल ऑपरेशन ना करवाना पड़ता। उनका कहना है कि लोगों को गुटखे व तंबाकू के सेवन से बचना चाहिए और मुंह व जीभ के कैंसर पीडि़तों को समय पर सर्जरी करवानी चाहिए।
ऐसे लगाई जीभ
मुंह के कैंसर से पीडि़तों के लिए वरदान के समान माइक्रो वेस्कुलर प्लास्टिक सर्जरी करीब 9 घंटे तक चली। इस जटिल सर्जरी में गर्दन की दोनों तरफ से सफाई की गई। गले से दो गांठों को भी निकाला गया। कैंसरग्रसित जीभ को काटकर निकालने के लिए खून की नलियों को बचाकर जबड़े को काटकर घुमाया गया। जांघ से मांस को खून की नलियों सहित काटकर निकाला गया। इसके बाद काटी गई जीभ के भाग को निकालकर जांघ के मांस से जीभ का पुन: निर्माण कर खून की नलियों को गर्दन की नलियों से जोडक़र खून का संचार शुरू किया गया।
राजेश भटनागर.
Published on:
20 Nov 2017 04:42 am
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