राजस्थान के झंझुनू जिले के खेतड़ी से ही शिकागो रवाना हुए थे स्वामी विवेकानंद, राजा ने की थी मदद, हर दिन पचास के करीब पर्यटक कर रहे हैं दीदार
नगेन्द्र सिंह
अहमदाबाद. राजस्थान के झंझुनू जिले के छोटे शहर खेतड़ी में बने अजीत-विवेक संग्रहालय में अहमदाबाद के राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) ने रंग भरे हंै। इसे इस तरह से डिजाइन किया है कि ऐतिहासिक महत्व की १५० साल पुरानी हैरिटेज बिल्डिंग 'फतेह बिलास' की खूबसूरती और निखरी है।
31 मार्च से शुरू हो चुके देश के सबसे बड़े अजीत-स्वामी विवेकानंद संग्रहालय में हर दिन 50 के करीब पर्यटक दीदार को पहुंच रहे हैं। संग्रहालय में प्रवेश करते ही स्वामी विवेकानंद की बड़ी प्रतिमा लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। केन्द्र सरकार और राजस्थान सरकार की ओर से की गई करीब छह करोड़ की आर्थिक मदद से संग्रहालय का निर्माण हुआ है।
संग्रहालय के संचालक एवं रामकृष्ण मिशन विवेकानंद स्मृति मंदिर के सचिव स्वामी आत्मनिष्ठानंद बताते हैं कि बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि स्वामी विवेकानंद खेतड़ी से ही अमरीका के शिकागो शहर में वर्ष १८९३ में हुई पहली धर्म संसद में भाग लेने के लिए रवाना हुए थे। यहां तक स्वामी विवेकानंद की पोषाक भी खेतड़ी में ही तैयार हुई थी। खेतड़ी के तत्कालीन राजा अजीत सिंह ने उन्हें न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि आर्थिक मदद भी की। अजीत सिंह और विवेकानंद न सिर्फ एक दूसरे के परम मित्र थे। वर्ष २०११ में हैरिटेज इमारत 'फतेह बिलास' का पहले नवीनीकरण किया गया। उसके बाद इसमें अजीत-विवेक संग्रहालय बनाया, जिसे एनआईडी ने बड़ी ही खूबसूरती से डिजाइन किया है।
एनआईडी के निदेशक प्रो.प्रविण नाहर ने बताया कि संस्थान के प्राध्यापकों एवं टीम ने राजस्थान के झंझुनू जिले के खेतड़ी में अजीत विवेक संग्रहालय को डिजाइन किया है, जिसका शुभारंभ हो चुका है। ये एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट था, जो स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह के संबंधों से जुड़ा है।
जहां ठहरे विवेकानंद वह कक्ष है ध्यान केन्द्र
स्वामी आत्मनिष्ठानंद बताते हैं कि स्वामी विवेकानंद वर्ष १८९१, १८९३ और १८९७ में तीन बार खेतड़ी आए थे। जिस कक्ष में वे ठहरे थे। उस कक्ष को आज ध्यान कक्ष के रूप में उपयोग में लिया जाता है।
ऐसा डिजाइन कि कहीं भी ले जा सकते हैं संग्रहालय
एनआईडी के डिजाइन विजन सेंटर के अध्यक्ष एवं प्राध्यापक मोहम्मद नईम शेख बताते हैं कि संस्थान के प्राध्यापक मयंक लूणकर एवं प्राध्यापिका तनिष्का कचरू की मदद से संस्थान के ४५ लोगों की टीम ने संग्रहालय को मूर्त रूप दिया। इसे इस प्रकार से डिजाइन किया है कि लोगों का ज्यादा से ज्यादा जुड़ाव हो। भीति चित्रों, 3 थ्री तकनीक, स्क्रीन की मदद से विवेकानंद और राजा अजीत की दोस्ती व उनके संबंध और जीवन को दर्शाया है। हैरिटेज इमारत में तकनीक का सीमित उपयोग करते हुए इसे ऐसे तैयार किया है कि कभी भी जरूरत पड़े तो इसे दूसरी जगह भी स्थानांतरित किया जा सकता है।
स्वामी के साथ जहाज पर विदेशी सफर की अनुभूति
15 खंड में तैयार हुए इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण है, जहाज की स्टीयरिंग व्हील, जिसे घुमाने पर पर्यटकों को सामने लगी स्क्रीन पर स्वामी विवेकानंद के साथ विदेश की यात्रा की अनुभूति होती है। विवेकानंद की पश्चिम की यात्रा की जानकारी एक स्लाइडर के माध्यम से दी गई है, जो लोगों को जोड़ती है। मुख्य आकर्षण शेखावाटी आर्ट के भिति चित्र भी हैं।
रस्सी खींचने पर कुए से निकलती हैं ज्ञान की बातें
संग्रहालय का एक और बेहतर आकर्षण है। यहां बनाया गया 'वेल ऑफ विस्डम' (ज्ञान का कुआ)। इस कुए में एक रस्सी के सहारे बाल्टी (डोल) लटकी है। रस्सी खींचने पर कुएं में लगी स्क्रीन पर ज्ञान की बातें जानने को मिलती हैं।