25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

IIT Gandhinagar: अब अमोनिया का उत्पादन करना होगा आसान व किफायती

नई 2 डी सामग्री से अमोनिया को संश्लेषित करने में मिली सफलता।

2 min read
Google source verification
ammonia

प्रतीकात्मक फोटो।

आईआईटी गांधीनगर की टीम ने नई 2 डी सामग्री से अमोनिया गैस के उत्पादन को आसान व किफायती बनाने वाला महत्वपूर्ण आविष्कार किया है। नई 2 डी सामग्री नाइट्रोजन (एन2) को सोखने और उसे हवादार परिस्थितियों में ही अमोनिया गैस (एनएच3) में परिवर्तित करने में कारगर है।

इससे अमोनिया के उत्पादन में उच्च दबाव और तापमान की जरूरत नहीं होगी। इससे बिजली की बचत होगी और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा। वर्तमान में अमोनिया गैस का उत्पादन उच्च ऊर्जा वाली हेबर-बॉश प्रक्रिया से होता है। इसमें हाइड्रोजन (एच2) और नाइट्रोजन (एन2) के अणुओं को विभाजित करने के लिए 200 एटमोस्फेयरिक प्रेशर और 500 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। यह अध्ययन हाल ही में अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स एंड इंटरफेसेस में प्रकाशित हुआ है।

शोध में मुख्य चुनौती नाइट्रोजन गैस को कुशलतापूर्वक तोडऩे की थी, क्योंकि नाइट्रोजन अपने दो परमाणुओं के बीच मजबूत तिहरे बंधन से बंधी होता है। संस्थान के केमिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर कबीर जसूजा के नेतृत्व में रिसर्च टीम ने टाइटेनियम डाइबोराइड (टीआईबी2) से प्राप्त नई 2डी उत्प्रेरक सामग्री (नैनोशीट) का उपयोग कर इस चुनौती को हल किया। यह ऐसी सामग्री है, जो मल्टी-स्टैक्ड सैंडविच जैसी दिखती है, जिसमें बोरोन की परतों के बीच में धातु मौजूद होता है।प्रो. जसूजा बताते हैं कि प्रयोगों के दौरान हुई आकस्मिक अवलोकन की घटना ने इसके लिए प्रेरित किया। नैनोशीट्स हवादार परिस्थितियों में नाइट्रोजन के साथ रिएक्शन कर रही थी, जिसकी हमने कभी उम्मीद नहीं की थी।प्रो.राघवन रंगनाथन की टीम ने कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग के जरिए जानकारी में पाया कि नाइट्रोजन की उपस्थिति में नैनोशीट पर टाइटेनियम और बोरोन परमाणुओं के बीच एक इलेक्ट्रॉन रस्साकशी होती है, जिस कारण यह असाधारण उत्प्रेरक क्षमता उत्पन्न होती है।

अमोनिया को परिवहन ईंधन का विकल्प बनाने में अहम

यह शोध अमोनिया को परिवहन ईंधन का बेहतर विकल्प बनाने में मददगार हो सकती है। अमोनिया को कार्बन डाईआक्साइड उत्पन्न किए बिना सीधे आंतरिक दहन इंजन में जलाया जा सकता है, लेकिन यह ईंधन का विकल्प नहीं बन पाई, क्योंकि इसे पैदा करने में अपनाई जाने वाली हैबर-बॉश प्रक्रिया काफी महंगी है। इससे विभिन्न ऊर्जा-आधारित प्रयोगों के लिए समृद्ध क्षमता वाली सामग्रियों को डिजाइन करने को रिसर्च की नई दिशा खुलेगी। इससे हाइड्रोजन को सुरक्षित रूप से संग्रहित करने में मदद मिलेगी।

कृषि, उद्योग, पर्यावरण में महत्वपूर्ण है अमोनिया

खाद उत्पादन में अमोनिया का उपयोग प्रमुख घटक के रूप में होता है। यह कई रसायनों, फार्मास्यूटिकल्स और विस्फोटकों के निर्माण में भी कार्य करता है। इसका उपयोग वाहनों और औद्योगिक प्रक्रियाओं से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए चयनात्मक उत्प्रेरक कटौती प्रणालियों में किया जाता है।