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Ahmedabad : अब महिला ब्लाइंड फुटबॉल वल्र्ड कप में भी बीपीए की दो युवतियों का चयन

विश्व विकलांग दिवस पर आज विशेष अगले वर्ष बर्मिंघम में होगा महिलाओं का ब्लांइड फुटबॉल वल्र्ड कप -पैरा टेबल टेनिस की जोड़ी भाविना पटेल व सोनल पटेल जीत चुकी हैं ओलंपिक खेलों में पदक

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Ahmedabad : अब महिला ब्लाइंड फुटबॉल वल्र्ड कप में भी बीपीए की दो युवतियों का चयन

Ahmedabad : अब महिला ब्लाइंड फुटबॉल वल्र्ड कप में भी बीपीए की दो युवतियों का चयन

अहमदाबाद. अगले वर्ष इंग्लैण्ड के बर्मिंघम Birmingham में होने वाले महिलाओं के ब्लाइंड फुटबॉल वल्र्ड कप टूर्नामेंट football world cup tournament में अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन (बीपीए) Blind People's Association (BPA) से दो युवतियों- निरमा ठाकरडा (25) और आशा चौधरी (23)-का भारतीय टीम में चयन किया गया है।

दिव्यांगों के हित के लिए कार्य करने वाली संस्था बीपीए, जिसे अंधजन मंडल भी कहा जाता है, ने जहां गत वर्ष ओलंपिक खेलों में तब जलवा बिखेरा था जब पैरा टेनिस स्पर्धा में यहीं की भावना पटेल और सोनल पटेल ने भारत के लिए ओलंपिक खेलों में पदक जीते थे। अब यहीं की दो युवतियों का भारतीय टीम में चयन किया गया है।
साबरकांठा जिले की वडाली तहसील के रहेडा गांव की निवासी निरमा और महाराष्ट्र्र के नासिक जिले के एक छोटे से गांव की मूल निवासी आशा दोनों ही जन्म से ही नेत्रहीन हैं। इन युवतियों का कहना है कि उन्होंने अब तक फुटबॉल के दो ही मैच खेले हैं। इन दोनों के जज्बे को देखकर इन्हें भारतीय टीम में स्थान मिला है।
इसे लेकर इन युवतियों का उत्साह देखते ही बनता है। फुटबॉल टीम में चयन से पहले भले ही इन्हें कोई दया की भावना से देखता होगा, लेकिन अब गांव के लोग इन पर गर्व महसूस कर रहे हैं। इनके गांवों में खुशी की लहर है।

मनोबल बढ़ाने की जरूरत

भारतीय फुटबॉल टीम में चयन से उत्साहित आशा चौधरी ने बताया कि दिव्यांगों पर लोग दया करते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम कोई काम करते हैं तो लोग सोचते हैं कि यह काम कैसे कर पाएगी। आशा का मानना है कि हम पर दया करने की जरूरत नहीं है। दिव्यांगों के प्रति समाज को ऐसी सोच रखनी चाहिए जिससे दिव्यांगों का मनोबल बढ़ा रहे।

डेढ़ वर्ष पहले निरमा ने पिता की छत्रछाया गंवाई

निरमा के पिता का डेढ़ वर्ष पहले निधन हो गया था। अपनी दादी और मां के साथ रहने वालीं निरमा ने बताया कि वह स्कॉलरशिप के अलावा मां के कड़े परिश्रम के बल पर पढ़ाई कर रही हैं। वे कहती हैं कि वैसे तो गांव के लोग पहले से ही अच्छा व्यवहार करते थे लेकिन अब भारतीय टीम में चयन होने से उनकी और इज्जत बढ़ गई है। गांव वालों ने नर्मदा एवं उसके परिवार को संभव मदद का भरोसा दिलाया है। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन वे दूसरे देश में भारतीय टीम का हिस्सा बनने के लिए जाएंगी।
बीपीए के जनसंपर्क अधिकारी दिनेश बहल ने बताया कि वर्ष 2023 में बर्घिंमन में में नेत्रहीनों के लिए विश्वकप होगा। इन दोनों युवतियों का भारतीय टीम में चयन किया गया है। ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाली भाविना पटेल और सोनल पटेल भी बीपीए की छात्राएं रह चुकी हैं।

कठोर परिश्रम के चलते चयन

निरमा और आशा सामान्य परिवार से सबंध रखती हैं लेकिन कठोर परिश्रम के चलते इनका चयन भारतीय टीम में हुआ है। ये दोनों ही युवतियां नेत्रहीन हैं, जो बीपीए में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहीं हैं।

भूषण पुनानी, महासचिव, बीपीए, अहमदाबाद