
प्रीतात्मक फोटो।
ahmedabad: अपनों को खोने का दुख ऐसा होता है, जिसमें शब्द भी साथ छोड़ देते हैं। अहमदाबाद में एक परिवार ने इसी असहनीय पीड़ा के बीच ऐसा फैसला लिया, जिसने दूसरे चार परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण जगा दी। ब्रेन हेमरेज के बाद ब्रेनडेड घोषित की गई 41 वर्षीय महिला के परिजनों ने उनकी पहचान और अपने दुख को सार्वजनिक किए बिना गुप्त रूप से अंगदान की सहमति दी। ऐसे में दान में मिले महिला के हृदय, लिवर और दोनों किडनियों से चार जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने का रास्ता खुला है।
महिला को गंभीर ब्रेन हेमरेज के बाद अहमदाबाद सिविल अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद पिछले दिनों उन्हें ब्रेनडेड घोषित किया गया। सिविल अस्पताल की अंगदान टीम के डॉ. निमेष देसाई ने परिजनों को अंगदान के महत्व और इससे बचाई जा सकने वाली जिंदगियों के बारे में समझाया। गम में डूबे परिवार ने सहमति दी और अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई।
दान किए गए चारों अंगों का जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट सिविल मेडिसिटी के ही अस्पतालों में किया। हृदय को कैंपस के यूएन मेहता अस्पताल में उपचाराधीन जरूरतमंद मरीज में प्रत्यारोपित किया गया, जबकि लिवर और दोनों किडनी इंंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिज एंड रिसर्च सेंटर (आइकेडीआरसी) अस्पताल में भर्ती मरीजों में प्रत्यारोपित की गईं। जिस घर में अपनों को खोने का सन्नाटा है, उसी निर्णय से चार दूसरे घरों में जीवन की उम्मीद कायम होगी
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि अंगदान केवल अंगों का दान नहीं है, बल्कि किसी के निराश जीवन में आशा और मुस्कुराहट लाने वाला श्रेष्ठ महादान है।अहमदाबाद सिविल अस्पताल में अब तक 252 ब्रेनडेड अंगदाताओं से 466 किडनी, 226 लिवर, 80 हृदय, 34 फेफड़े, 21 पेंक्रियाज, छह हाथ और दो छोटी आंत सहित कुल 835 अंग प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा 200 नेत्र और 48 त्वचा सहित 248 ऊतकों का दान भी हुआ है। इस तरह अस्पताल में अब तक कुल 1,083 अंग और ऊतकों का दान प्राप्त हो चुका है।
Updated on:
31 Aug 2026 10:46 pm
Published on:
31 Aug 2026 10:46 pm
