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आयुर्वेदिक दवाई से विकलांगता दूर होने के बहाने से एक लाख ठगे

नकली दवाई देने के बाद दुकान बंद करके व्यापारी फरार,डेढ़ महीने मालिश करने पर भी फायदा न होने पर खुली पोल

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अहमदाबाद. दोनों पैरों से विकलांग युवक को नरोडा गैलेक्सी सिनेमा के समीप एक महिला ने आयुर्वेदिक दवाई से मालिश करने पर विकलांगता दूर करने के बहाने से एक लाख आठ हजार रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है। आयुर्वेदिक दवाई के नाम पर एक लाख रुपए की नकली दवाई देकर विश्वासघात व ठगी करने का मामला मणिनगर थाने में दर्ज हुआ है।
नरोडा बैठक स्थित न्यू केतन सोसायटी निवासी राकेश चक्रवर्ती (२६) ने मणिनगर थाने में किशोरभाई, केतनभाई व खुद को आणंद का निवासी बताने वाली दो महिलाओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। इन पर आरोप है इन्होंने नकली दवाई देकर उनके पास से एक लाख आठ हजार रुपए ले लिए और फिर दुकान बंद करके फरार हो गए।
इन चारों पर आरोप है कि इन्होंने मिली भगत करते हुए राकेश के भाई संतोष (२८) कि जो दोनों ही पैरों से विकलांग है। इनमें से सबसे पहले एक महिला १२ फरवरी को गैलेक्सी सिनेमा के समीप जब उनका भाई मोबाइल फोन की एसेसरीज खरीदने गया था। उस समय मिली। संतोष को देखने के बाद कहा कि उनका भाई भी दोनों पैरों से विकलांग था। एक आयुर्वेदिक दवाई के चलते वह ठीक हो गया। अब दोनों पैरों पर खड़ा होता है चलता, फिरता है। आप भी ठीक हो सकते हो। यदि दवाई चाहिए तो फोन करना। नंबर देकर वह चली गई। इस नंबर पर फोन करने पर एक अन्य महिला ने फोन उठाया और दवाई के बारे में जानती होने की बात कहते हुए। वह नरोडा में संतोष के घर भी १८ फरवरी को आई। इस दिन राकेश से घी, तुलसी के पत्ते, गुलाब के पत्ते, नारियल का तेल, नारियल का पानी और एक स्टील की बरनी मंगवाकर उसमें यह सब मिला दिया। फिर आयुर्वेदिक दवाई दिलवाने के नाम पर राकेश को लेकर मणिनगर पुष्पकुंज में स्वागत कॉम्पलैक्स में स्थित श्री ओम आयुर्वेदिक नाम की दुकान पर ले गई। जहां दवाई (पावडर) दिलाने के नाम पर इसी बरनी में अभ्रक भस्म (११४ रुपए का एक ग्राम), योगेंद्र रस (३१० का एक ग्राम) , भालचंद्र रस (६०० का एक ग्राम), स्वर्ण भस्म (२२५० की एक ग्राम) बताते हुए दवाई का एक लाख आठ हजार छह सौ रुपए का बिल बना दिया। विश्वास जीतने के लिए कहा कि फायदा ना हो तो ७५ प्रतिशत पैसे वापस। ७५ प्रतिशत राशि का चेक भी दिया। राकेश ने २० हजार रुपए दिए और ८० हजार का चेक दिया। जिसे लेने के लिए केशव ने एक करण नाम के युवक को भेजा था। इस दवाई से डेढ़ महीने मालिश करने पर भी फायदा नहीं होने पर केशव की ओर से दिया चेक बैंक में जमा कराया तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद फोन उठाना बंद कर दिया। दुकान जाकर पता किया तो दुकान बंद मिली। कॉम्पलैक्स एसोसिएशन सचिव ने कहा कि दो महीने का किराया दिए बिना ही वह फरार हो गया है।