
विपक्ष का आरोप- एससी, ओबीसी व अल्पसंख्यक वर्गों को बजट आवंटन कम
विपक्षी कांग्रेस ने सोमवार को गुजरात विधानसभा में अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों के वेलफेयर फंड को लेकर अपेक्षाकृत कम बजट आवंटन का आरोप लगाया। प्रश्न काल के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष पर तीखी बहस हुई। जहां विपक्षी कांग्रेस का दावा था कि अनारक्षित की तुलना में आरक्षित समुदायों को बहुत ही कम बजट आवंटित किया गया है। वहीं राज्य सरकार ने सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लेकर इसका बचाव किया। साथ ही इन तबकों को आवंटित ऋण और वित्तीय सहायता के आंकड़े पेश किए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भानूबेन बाबरिया ने कांग्रेस पर विभाजनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया।
गुजरात विधानसभा में सोमवार सुबह प्रश्न काल के दौरान कांग्रेस के विधायक दल के नेता अमित चावड़ा ने राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग पर ऋण आवंटन को लेकर सवाल उठाया था। जवाब में सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री भीखूसिंह परमार ने कहा कि राज्य के बोर्ड-निगमों को वर्ष 2021-22 एवं वर्ष 2022-23 में 1167.43 करोड़ रुपए ऋण के तौर पर दिए गए। वहीं सहायता के तौर पर 39.14 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई। आवंटित राशि का उपयोग नहीं होने के सवाल पर मंत्री परमार ने कहा कि आवेदकों की ओर से दस्तावेज समय से नहीं दिए जाने पर राशि का उपयोग नहीं हो पाता। बोर्ड-निगमों की योजनाओं के लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मुहैया कराने के लिए विज्ञापन दिए जाते हैं और ऑनलाइन आवेदन मंगाए जाते हैं।
हालांकि मंत्री परमार के जवाब से चावडा संतुष्ट नहीं हुए और सवाल उठाया कि अनारक्षित वर्ग को आवंटित राशि की तुलना में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को कम राशि आवंटित की गई। जो दस बोर्ड और निगम हैं उनमें आठ तो अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए हैं।
चावडा के अलावा कांग्रेस के विधायक इमरान खेड़ावाला ने भी सवाल उठाते कहा कि सरकार ने गुजरात अल्पसंख्यक वित्त और विकास निगम को 11.2 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जबकि आवेदकों को सिर्फ 8 करोड़ रुपए का ही आवंटित किए गए। एक अन्य कांग्रेस विधायक अमृतजी ठाकोर ने भी सरकार पर राशि आवंटन में असमानता का आरोप लगाते हुए कहा कि ठाकोर एवं कोली विकास निगम को सरकार ने 50 करोड़ रुपए आवंटित किए, जबकि गुजरात अनारक्षित शिक्षा एवं आर्थिक विकास निगम को वर्ष 2022-23 मं 500 करोड़ रुपए आवंटित किए।
कांग्रेस अपना रही है विभाजन की नीति : बाबरिया
उधर, कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भानूबेन बाबरिया ने कहा कि इन बोर्ड और निगमों के जरिए ही ऋण और सहायता वितरित की जाती है। निगम की ओर से स्कॉलरशिप और अन्य हाउसिंग स्कीम के जरिए अनुसूचित जाति, ओबीसी एवं अल्पसंख्यकों की कई योजनाएं चलाई जाती हैं। दस बोर्ड और निगमोंं में से अनुसूचित जाति और ओबीसी के कल्याण के लिए कार्य करनेवाले आठ बोर्ड और निगमों को 293 करोड़ रुपए बजट आवंटित किया गया। यह बजट पिछले वर्ष से ज्यादा है, लेकिन कांग्रेस विभाजित करने की नीति अपनाई रही है।
Published on:
19 Feb 2024 09:48 pm
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