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Patrika Talk Show: साइबर अपराध- रियल लाइफ की सतर्कता, ​डिजिटल स्पेस में जरूरी

Patrika Talk Show, Cyber Crime, Bank of Baroda

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Patrika Talk Show: साइबर अपराध- रियल लाइफ की सतर्कता, ​डिजिटल स्पेस में जरूरी

Patrika Talk Show: साइबर अपराध- रियल लाइफ की सतर्कता, ​डिजिटल स्पेस में जरूरी


अहमदाबाद. साइबर क्राइम अहमदाबाद के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अजीत राज्यान ने कहा कि साइबर अपराध के सबसे ज्यादा शिकार आम नागरिकों में सीनियर सिटीजन, महिला व बच्चे होते हैं। जिस तरह से हम भौतिक रूप से सामान्यतया व्यवहार करते हैं उसी तरह का व्यवहार हमें डिजीटल स्पेस मेंं भी करना होगा। इसमें हमें इसी तरह सतर्कता से रहना होगा। ऑनलाइन भी इसी तरह का व्यवहार होना चाहिए।

राज्यान राजस्थान पत्रिका के अहमदाबाद संस्करण के 22वें स्थापना दिवस के अवसर पर बैंक ऑफ बड़ौदा और राजस्थान पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को विचार गोष्ठी (टॉक शो) में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। साइबर अपराध व रोकथाम विषय पर बैंक ऑफ बड़ौदा के लॉ गार्डन स्थित अंचल कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में आईपीएस अधिकारी राज्यान ने कहा कि यदि आपको अज्ञात नंबर से कोई लिंक भेजता हो या कॉल करता हो तो आपको पूछना चाहिए। रियल लाइफ की सतर्कता डिजीटल स्पेस में ही होना चाहिए। उन्होंने पास वर्ड बदलते रहने या फिर स्ट्राॅन्ग पासवर्ड रखने की सलाह दी। इस तरह साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है।
कोई भी साइबर अपराध को हो सकता है शिकार

राज्यान के मुताबिक लोगों को अपने दिमाग से यह बात निकाल लेनी चाहिए कि कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार नहीं हो सकता है। सभी लोग इसका शिकार हो सकते हैं। जो अपराधी हैं वे काफी ज्यादा पढ़े -लिखे नहीं होते हैं। इसमें 11 से 12 साल के लड़के या कम पढ़े लिखे लोग भी होते हैं। तकनीक के माध्यम ने क्रिमिनल साइकोलोजी को भी सशक्त किया है। साइबर अपराधी किसी भी एक फोन से कई लोगों को शिकार बना बना सकता है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध में ह्यूमन साइकोलॉजी काम करती है। अपराधी इसी पर अपना फोकस रखकर काम करते हैं। इस अपराध में अपराधी का पता नहीं चलता है। एआई, डीप फेक, व्हाट्एस पर रूयूमर मॉन्गरिंग की बात बताते हुए उन्होंने कहा कि साइबर अपराध में इज ऑफ ऑपरेशन है। इस अपराध के सामाजिक, आर्थिक, वित्तीय सभी तरह के डायमेंशन हैं।

डीसीपी राज्यान ने भी इस कार्यक्रम के लिए पत्रिका, बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के महानुभावों का आभार माना।

साइबर अपराध ज्वलंत समस्या, सतर्कता ही उपाय: बापना

बैंक के महाप्रबंधक व अहमदाबाद अंचल प्रमुख अश्विनी कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में उप अंचल प्रमुख प्रदीप कुमार बाफना ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि साइबर अपराध आज एक ज्वलंत समस्या है। सबसे बड़ी समस्या है। हर दूसरी शिकायत भी साइबर क्राइम से जुड़ी होती है। अच्छे-अच्छे और पढ़े लिखे लोग इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इस अपराध से बचने का जागरूकता के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने उपभोक्ताओं के लिए जागरूक करने के उपाय किए हैं।
उन्होंने आगंतुकों से कहा कि प्रतिष्ठित लोगों को अपने समाज के भीतर इस तरह की संगोष्ठी कर लोगों को इसके बारे में जागरूकता फैलानी पड़ेगी। साइबर अपराध करने वाले हम लोगों से ज्यादा स्मार्ट हैं। वे नए-नए तरीके निकालते रहते हैं।

महामारी है साइबर अपराध: मनीष

सोशल मीडिया विशेषज्ञ कुमार मनीष ने बताया कि साइबर अपराध एक तरह की महामारी है जिससे सभी लोग जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी इसका ज्यादा शिकार हो रही है। ऐसे में युवाओं को चाहिए कि यदि वे किसी अपराध का शिकार होते हैं तो माता-पिता या परिजनों को बिना झिझक बताएं। माता-पिता भी इतने जागरूक हैं कि उनका पूरा सहयोग करेंगे।


जागरूकता की जरूरत: डॉ जंसारी

गुजरात यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अश्विन जंसारी ने कहा कि आए दिन लोग साइबर क्राइम का शिकार हो रहे हैं। इस संबंध में अभी भी लोगों को जागरूकता बरतने की जरूरत है। लोग यदि कुछ सतर्कता बरतें तो इस खतरे को स्वयं ही टाला जा सकता है। सभी यह याद रखें कि लालच में नहीं आना चाहिए। सतर्क रहकर इस खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है।

बदल रहे अपराध के तरीके: जिंदल

श्री अग्रवाल विकास महासभा की गुजरात इकाई की पर्यटन समिति के मुख्य संयोजक व समाज सेवी गिरीश जिंदल के अनुसार दिन ब दिन साइबर अपराध बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। जब कोई व्यक्ति शिकार होता है तो शिकायत दर्ज करने में मुश्किलें आती हैं।


साइबर अपराध से बचाव को छोटे-छोटे कदम उठाने जरूरी: महनोत


चार्टर्ड अकाउंटेट (सीए) अक्षय महनोत ने कहा कि छोटे-छोटे कदम उठाने से भी साइबर अपराध से बचने में मदद मिल सकती है। इन कदमों में समय-समय पर पासवर्ड बदलना, एटीएम में संदिग्ध व्यक्ति पर नजर रखकर काम करें। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रिका के साथ जन्म का और बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ कर्म का नाता है।

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13 भाषाओं में एसएमएस अलर्ट सुविधा: राठौड़

इस अवसर पर बैंक के मुख्य प्रबंधक (राभा) चंद्रवीर सिंह राठौड़ ने बताया कि बैंक की ओर से ग्राहकों के खाते में होने वाले अंतरण संबंधी एसएमएस अलर्ट की सुविधा हिंदी, गुजराती, अंग्रेजी व 10 अन्य भारतीय भाषाओं में प्रदान की जा रही है। बॉब वर्ल्ड में भी 13 भाषाओं में एप उपयोग की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही वाट्स एप बैंकिंग सुविधा भी अंग्रेजी के साथ हिंदी एवं गुजराती में उपलब्ध है। इससे निश्चित रूप से ग्राहकों को अपनी भाषा में बैंकिंग सुविधा मिलने से साइबर अपराध पर अंकुश लगेगा और ग्राहक अपने वित्तीय लेन देन की प्रति सचेत रहेगा।


पत्रिका पढ़े बिना दिन अधूरा:बापना


बापना ने इस कार्यक्रम के लिए पत्रिका को साधुवाद देते हुए बताया कि पत्रिका सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि वे बचपन से ही पत्रिका पढ़ते आ रहे हैं। पहला अखबार यही पढ़ा। अगर वे पत्रिका नहीं पढ़ते हैं तो लगता है दिन अधूरा है। पत्रिका का कोई मुकाबला नहीं है। पत्रिका के आलेख काफी प्रभावी होते हैं। यह अखबार सामाजिक जागरूकता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने पत्रिका इन एजकुेेशन के महत्व के बारे में भी बताया।

ये गणमान्य रहे उपस्थित

इस अवसर पर एनएफएसयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ निलय मिस्त्री, एनपीपी सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष भूपेश प्रजापति, सिख फाउंडेशन की गुजरात इकाई की अध्यक्ष परमजीतकौर छाबड़ा, धोबी महासंघ की गुजरात इकाई के अध्यक्ष वरदीचंद धोबी, युवा ब्रह्म शक्ति मेवाड़ की गुजरात इकाई के अध्यक्ष सोहन जोशी तथा बैंक ऑफ बड़ौदा के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का आभार ज्ञापन राजस्थान पत्रिका के शाखा प्रबंधक अजय जपी ने जताया।