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Pavagadh temple : यहां स्थित है मां कालिका की दक्षिण मुखी प्रतिमा

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Pavagadh temple : यहां स्थित है मां कालिका की दक्षिण मुखी प्रतिमा

Pavagadh temple : यहां स्थित है मां कालिका की दक्षिण मुखी प्रतिमा

हालोल. पंचमहाल जिले की हालोल तहसील से मात्र 7 किलोमीटर दूर रमणीय पर्वत की अंतिम चोटी पर जगत जननी मां कालिका का मंदिर है जिसे रामायण युग के महान ऋषि मुनि विश्वामित्र की ओर से स्थापित किया गया था इसी पर्वत पर दिगंबर जैन समुदाय के 7 मंदिर हैं। माता का यह प्रसिद्ध मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। शक्तिपीठ उन पूजा स्थलों को कहा जाता है, जहां सती मां के अंग गिरे थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार पावागढ़ में सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था, इसलिए यह स्थल पूजनीय और पवित्र माना जाता है। यहां की एक खास बात यह है भी है कि यहां दक्षिण मुखी काली मां की प्रतिमा है।


विश्वामित्र ने स्थापित की थी माता की मूर्ति


पौराणिक कथाओं के अनुसार इस पहाड़ी को गुरु विश्वामित्र से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि गुरु विश्वामित्र ने यहां कालिका मां की तपस्या की थी। यह भी माना जाता है कि मां की मूर्ति को विश्वामित्र ने ही प्रतिष्ठित किया था। यहां पर आम दिनों के अलावा दोनों नवरात्र के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती है। गुजरात के ही नहीं, अपितु राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों के भक्त भी माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। पावागढ़ पहाड़ की उम्र लगभग 8 करोड़ वर्ष की मानते हैं। पर्वत 40 वर्ग किलोमीटर के घेरे में फैला हुआ है।
पावागढ़ मंदिर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। काफी ऊंचाई पर बने इस दुर्गम मंदिर की चढ़ाई बेहद कठिन है। अब सरकार ने यहां रोप-वे सुविधा उपलब्ध करवा दी है, जिसके जरिए पहाड़ी तक आसानी से पहुंच सकते हैं। यह सुविधा माची से शुरू होती है। रोप-वे से उतरने के बाद २५० सीढिय़ां चढऩे के बाद मंदिर का मुख्य द्वार आता है। यह मंदिर पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। बताया जाता है कि यह मंदिर अयोध्या के राजा भगवान राम के समय का है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां से भगवान राम के पुत्र लव और कुश मोक्ष प्राप्त किया था।

विश्व विरासत में शामिल पावागढ़


वर्ष 2004 में पावागढ़ को विश्व विरासत में शामिल किया गया। उसके बाद यहां विकास हुआ। विकास की योजनाएं चल रही हैं। कालिका मां के मंदिर तक नर्मदा जल पहुंचा। मंदिर तक जाने के लिए नई सीढिय़ां बनाई गई। रेलिंग लगाई गई। स्मारकों के रखरखाव की बेहतर व्यवस्था की गई। आवश्यक सुधार हुए। पुरातत्व विभाग के अलावा गुजरात सरकार ने भी विकास के लिए 100 करोड़ से अधिक रुपए खर्च किए हैं। आगामी दिनों में कालिका माता के मंदिर के निर्माण को नयापन दिया जाएगा। प्रस्तावित बड़ा तालाब में वोटिंग आदि की व्यवस्था की जाएगी और हर प्रकार से इस क्षेत्र को सुंदर बनाया जाएगा।

-घनश्याम जोशी-इतिहासकार