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 प्रार्थना- कलमा के बीच अंगदान से मानवता की सेवा का उदाहरण पेश किया
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 प्रार्थना- कलमा के बीच अंगदान से मानवता की सेवा का उदाहरण पेश किया

Ahmedabad शहर के सिविल अस्पताल के एक कमरे में जहां एक ओर प्रार्थना हो रही थी, वहीं दूसरी ओर कलमा पढ़ा जा रहा था। यह भावनात्मक दृश्य उस वक्त उभरा जब दो परिवारों ने अपनों को खोने के बावजूद अंगदान के लिए स्वीकृति दी। पवित्र रमजान माह में जब पूरा मुस्लिम समाज खुदा की इबादत […]

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Ahmedabad शहर के सिविल अस्पताल के एक कमरे में जहां एक ओर प्रार्थना हो रही थी, वहीं दूसरी ओर कलमा पढ़ा जा रहा था। यह भावनात्मक दृश्य उस वक्त उभरा जब दो परिवारों ने अपनों को खोने के बावजूद अंगदान के लिए स्वीकृति दी। पवित्र रमजान माह में जब पूरा मुस्लिम समाज खुदा की इबादत में लीन है, तब जूनागढ़ के एक मुस्लिम परिवार ने अपनी प्रिय महिला सदस्य जिबुन चावड़ा के अंगों का दान कर मानवता की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह अस्पताल में मुस्लिम परिवारों की ओर से किए गए अंगदान का नौवां मामला था। 14 घंटों के भीतर एक अन्य परिवार ने भी अपनी 25 वर्षीय बेटी के अंगों का गुप्त दान किया। इन दोनों परिवारों की ओर से छह (तीन-तीन) अंगों का दान किया गया। इन अंगदानों ने न केवल धार्मिक आस्थाओं को, बल्कि मानवता के सिद्धांतों को भी मजबूत किया। इससे कुल छह लोगों को नया जीवन मिल सकेगा।

जूनागढ़ के केशोद में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुईं जिबुनबेन (51) को ब्रेन डेड घोषित किया। यह सुनते ही पूरे परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। इस कठिन घड़ी में ऑल इंडिया मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन की यास्मीन वोरा और शहर के प्रतिष्ठित मौलाना ने परिवार को अंगदान के महत्व को समझाया। अंततः जिबुनबेन के परिवार ने अंगदान की स्वीकृति दी।अस्पताल के स्टाफ ने जिबुनबेन के अंगों को रिट्रीव करने के लिए तैयारियां शुरू की। आम तौर पर अस्पताल का स्टाफ दाता को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रार्थना करता है, लेकिन इस बार का दृश्य कुछ अलग था। जहां डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मौन प्रार्थना कर रहे थे, वहीं जिबुनबेन के परिवार के सदस्य आंसुओं में डूबे हुए कलमा पढ़ रहे थे। इस दृश्य ने यह दर्शाया कि मानवता और धर्म किसी भी सीमाओं से परे हैं। जिबुनबेन के अंगदान से दो किडनी और एक लीवर प्राप्त किया गया।

उपचार के दौरान युवती हुई थी ब्रेन डेड

उधर 25 वर्षीय युवती की मौत ब्रेन डेड की वजह से हुई, और उनके परिवार ने भी अंगदान करने का फैसला लिया। हालांकि, इस परिवार ने गुप्तदान किया था। अंगदान टीम के डॉक्टर मोहित चंपावत ने परिवार के सदस्यों को अंगदान के बारे में समझाया। इस निर्णय से दो किडनी और एक लीवर प्राप्त हुआ, जिससे तीन और लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा।

चार वर्ष में दान में मिले 995 अंग, 742 को मिला नया जीवन

सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि पिछले चार वर्षों में 231 अंगदाताओं से 995 अंग और ऊतक दान किए गए हैं, जिससे 742 लोगों को नया जीवन मिला है। यह संख्या इस बात की गवाही देती हैं कि अंगदान सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक जीवनदायिनी कार्य है, जो समाज में बदलाव लाने में मदद करता है। अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।