
Pomegranate farming in Patan
हिम्मतनगर. कृषि में विशेषकर कपास, गेहूं, सरसों जैसी परम्परागत खेती में मुनाफा कम मिलने के कारण किसान अब बागायती खेती की ओर मुडऩे लगे हैं। पाटण जिले के संखारी गांव के किसान ने बागायती खेती में हाथ अजमाया और अनार की खेती में पिछले तीन वर्षों से ४०-४५ टन अनार का उत्पादन कर १५-२० लाख की आय प्राप्त कर रहा है।
सामान्य रूप से किसानों की ओर से वर्षों से चली आ रही परम्परा के अनुसार खेत उत्पादों की बुवाई कर सामान्य आय प्राप्त की जाती है, लेकिन इस खेती से किसानों को कोई मुनाफा नहीं होता है, जिससे चलते किसानों के जीवन स्तर में कोई फर्क दिखाई नहीं देता है। ऐसे में शिक्षित युवक खेती को एक व्यवसाय के रूप में देखने लगे हैं और खेती में आय-व्यव व हानि-लाभ के अंतर को देखते हैं। इसके कारण ही आज का प्रगतिशील किसान कम खर्च में अधिक उत्पादन एवं मुनाफा प्राप्त करने के लिए बागायती खेती की ओर से मुड़े हैं।
पाटण जिले में फिलहाल जिले के प्रगतिशील किसान विभिन्न प्रकार के आर्गेनिक सब्जी, अनार, नींबू, पपीता, खारिक व अमरूद जैसी बागायत फसल की खेती कर लाखों रुपए कमा रहे हैं।
पाटण तहसील के संखारी गांव निवासी राजूभाई प्रजापति भी अनार की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि पहले वह भी सरसों, कपास एवं गेहूं की खेती करते थे, लेकिन उत्पादन के पीछे खर्चा अधिक होने के बावजूद मुनाफा नहीं होता था, ऐेसे में उन्होंने अपने १२ बीघे जमीन में अनार के पौधे रोपे और पिछले तीन वर्षों से अच्छा उत्पादन हो रहा है।
राजूभाई का कहना है कि प्रथम वर्ष १५ टन अनार का उत्पादन हुआ और ११ लाख की आय हुई थी। दूसरी वर्ष में ४५ टन उत्पादन व १९.५० लाख की आय हुई थी। इसके अलावा तीसरी वर्ष में ४० टन उत्पादन व १५ से १७ लाख रुपए की आय होने की संभावना है।
उनका कहना है कि जारी वर्ष में बारिश कम होने के कारण जमीन में पर्याप्त नमी की कमी है, ऐसे में पौधों में ट्यूबबेल से सिंचाई की जा रही है, जिसके कारण उत्पादन खर्च अधिक होता है। दूसरी ओर बारिश कम होने से अनार के फल का विकास गत वर्ष की तुलना में कम हुआ है, जिसके चलते फल का वजन कम है।
Published on:
03 Jan 2019 03:48 pm
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