
आणंद. सरदार वल्लभभाई पटेल के पैतृक गांव करमसद को आणंद महानगर पालिका में शामिल करने के विरोध में सरदार सम्मान संकल्प समिति की ओर से रविवार से करमसद में बस स्टैंड के पास दस दिवसीय धरना आंदोलन प्रारंभ हुआ।
करमसद बस स्टैंड के पास सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद प्रारंभ हुए धरने में पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला शामिल हुए। वाघेला ने कहा कि सरकार सरदार पटेल की भूमि करमसद की पहचान मिटाने का प्रयास कर रही है। अखंडता के आधार पर पूरे देश को जोड़ने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल के गांव की पहचान बचाने के लिए ग्रामीणों को आंदोलन करना पड़े यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि करमसद की पहचान कायम रखने के लिए करमसद को स्वायत्तशासी दर्जा देकर विकसित किया जाना चाहिए। सरदार स्मृति का अनुदान बंद कर देना, सरदार पटेल एयरपोर्ट से सरदार पटेल का नाम मिटाना सरदार पटेल का अपमान है, उन्होंने कहा था कि दस लाख से ज्यादा आबादी वाली महानगर पालिका नहीं होनी चाहिए। सूरत और अहमदाबाद इसके उदाहरण हैं। इससे उपद्रव फैलता है, गुंडागर्दी होती है, तो सरकार को आणंद को मनपा बनाने की शुरुआत करनी चाहिए और छोटे लेकिन सुंदर शहर बनाने चाहिए।
इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता परेश धनाणी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि लौह पुरुष सरदार पटेल ने पूरे देश के राजे-रजवाड़ों को एक किया और पूरे देश को अखंडता की भावना के धागे में पिरोया, अठारह जातियों को एक किया और अखंड भारत की नींव रखी। सरकार सरदार पटेल के मूल्यों को नष्ट करने का काम कर रही है, इसे देश के नक्शे से मिटाने की कोशिश कर रही है। सरकार को जगाने और सरकार को हिलाने तथा लौह पुरुष की करमसद की भूमि की पहचान बनाए रखने के लिए करमसद में आंदोलन शुरू किया गया है, जिसका समर्थन करने के लिए मैं आज यहां एक गौरवान्वित गुजराती के रूप में विरोध में शामिल हुआ हूं।
इस अवसर पर बापेश्वर महादेव के महंत मधुसूदनगिरि, पास आंदोलन के संयोजक धनजी पाटीदार, मनोज पनारा, निलेश एरवडिया, वरुण पटेल, चिराग पटेल, सरदार सम्मान संकल्प समिति के संयोजक मिथिलेश अमीन सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
Published on:
09 Feb 2025 10:37 pm
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