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Pt Birju Maharaj: सप्तक में प्रस्तुति देने के लिए निमंत्रण का इंतजार नहीं करते थे बिरजू महाराज

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Pt Birju Maharaj: सप्तक में शामिल होने व प्रस्तुति देने के लिए निमंत्रण का इंतजार नहीं करते थे बिरजू महाराज

Pt Birju Maharaj: सप्तक में शामिल होने व प्रस्तुति देने के लिए निमंत्रण का इंतजार नहीं करते थे बिरजू महाराज

अहमदाबाद. जाने-माने कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज के निधन पर देश के संगीतज्ञों में घोर दु:ख है। अहमदाबाद में देश में सबसे लंबे समय तक चलने वाले सप्तक संगीत समारोह में वे लगभग हर वर्ष अपनी प्रस्तुति से लोगों को आकर्षित करते थे। इस बार भी वे अपना नृत्य पेश करने वाले थे लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते यह समारोह रद्द हो गया।

सप्तक संगीत समारोह की संचालिका मंजू मेहता ने कहा कि पंडित बिरजू महाराज के निधन से कथक के एक युग की समाप्ति हो गई। उन्होंने कहा कि कथक की सबसे अनूठी शैली 'शाल पक्ष 'की प्रस्तुति देने वाला और कोई कलाकार हो ही नहीं सकता। वे सप्तक संगीत समारोह में शामिल होने और प्रस्तुति देने के लिए निमंत्रण का इंतजार नहीं करते थे। उनके बिना सप्तक अधूरा रहेगा। मेहता के मुताबिक सरल और मृदुभाषी होने की वजह से वे सभी लोगों से सहज ही मुलाकात करते थे। सप्तक में उन्होंने वर्ष 2020 में अपनी अंतिम प्रस्तुति दी थी।

ऐसा विद्वान नर्तक शायद ही कोई हो: पंडित पूरन महाराज

प्रसिद्ध तबला वादक पंडित पूरन महाराज ने बताया कि बचपन से ही वे पंडित बिरजू महाराज के बहुत बड़े प्रशंसक रहे। ऐसा विद्वान नर्तक शायद ही कोई हो। गोपी किशन, पंडित रवि शंकर, सितारा देवी जैसे लोग उनका खूब आदर करते थे। वे सप्तक में हर साल प्रस्तुति देते थे। लोगों को उनकी प्रस्तुति का खूब इंतजार रहता था। ऐसे महान कलाकार की क्षति अपूरणीय व दुर्लभ है। उनका नृत्य देखने में खूब मजा आता था।

तीनों कलाओं में हासिल थी महारत: तन्मय मिश्रा

मोहण वीणा वादक व जवाहर नवोदय विद्यालय अहमदाबाद में शिक्षक तन्मय मिश्रा के मुताबिक उनके पिता पंडित जवाहर लाल मिश्रा पंडित बिरजू महाराज के अच्छे दोस्त थे। उनके पिता को अहमदाबाद, उज्जैन, इन्दौर जैसे कई शहरों में शास्त्रीय संगीत कार्यक्रमों में पंडित बिरजू महाराज के साथ प्रस्तुति देने का मौका मिला। वे एक ऐसे कलाकार थे, जिन्हें न सिर्फ नृत्य बल्कि गायन-वादन तीनों ही कलाओं में महारत हासिल थी।

सोमनाथ मंदिर में भी की थी नृत्य भक्ति

प्रभास पाटण. जाने-माने कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज ने गुजरात की यात्रा के दौरान देश के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव मंदिर में भी नृत्य भक्ति की थी। वर्षों पहले सोमनाथ मंदिर में पहुंचने के बाद उन्होंने महादेव के दर्शन किए और अलौकिक-दिव्य अनुभूति प्राप्त की थी। सोमनाथ ट्रस्ट के पूर्व महा प्रबंधक कमलेश रावल के अनुसार बिरजू महाराज ने सोमनाथ मंदिर के कीर्तन हॉल में कृष्णभक्ति के विभिन्न पदों व स्वर-संगीत के साथ विभिन्न भाव-मुद्राओं में नृत्य कर शिव-श्रीकृष्ण भक्तों को आनंदित किया था। शिव सानिध्य नृत्य अभिषेक के कार्यक्रम में मौजूद रहे सोमनाथ के संगीत-कला शास्त्री मार्कंड पाठक के अनुसार ठुमरी-दादरा व प्रसिद्ध रचना काहे मोहे छेड़े.. नृत्य के दौरान बिरजू महाराज की हाव-भाव व मुद्रा देख व सुनकर वे स्वयं को धन्य महसूस करने लगे।