
इतर प्रवृत्तियों की फीस नहीं होगी अनिवार्य: सुप्रीमकोर्ट
अहमदाबाद. शिक्षा के अलावा इतर प्रवृत्तियों के लिए कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों से अनिवार्यरूप से फीस वसूल नहीं कर सकता। जिन निजी स्कूलों ने शैक्षणिक वर्ष २०१७-१८ और २०१८-१९ के लिए अभी तक भी अपनी फीस निर्धारित करने के लिए फीस रेग्युलेशन कमेटी (एफआरसी) के समक्ष आवेदन नहीं किया है। ऐसे १८ सौ स्कूलों को दो सप्ताह में आवेदन करना होगा। ऐसा नहीं करने वाले निजी स्कूलों पर राज्य सरकार को नियमानुसार कार्रवाई करने का भी निर्देश सुप्रीमकोर्ट ने दिया है।
गुजरात सरकार की ओर से निजी स्कूलों की फीस वसूली में मनमानी पर रोक लगाने के लिए बनाए गए गुजरात राज्य फीस नियमन कानून-२०१७ व उसके प्रावधानों को लेकर बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट ने यह निर्देश दिया।
शिक्षामंत्री भूपेन्द्र सिंह चुड़ास्मा ने सुप्रीमकोर्ट की ओर से बुधवार को दिए गए अंतरिम निर्देश की संवाददाताओं को जानकारी देते हुए बताया कि फीस नियमन के संदर्भ में सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि शिक्षा के लिए ली जाने वाली शिक्षा फीस के अलावा अन्य किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस के लिए निजी स्कूल अभिभावकों पर दबाव नहीं डाल सकते हैं।
चुड़ास्मा ने बताया कि जिन १८०० निजी स्कूलों ने फीस निर्धारित कराने के लिए अब तक एफआरसी में आवेदन नहीं किया है उन स्कूलों को एफआरसी में आवेदन करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीमकोर्ट में याचिकादायर करने वालों में से एक ऑल गुजरात वाली मंडल के नरेश शाह ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट की ओर से दिए गए अंतरिम आदेश में काफी हद तक अभिभावकों को न्याय मिला है। उनकी ओर से पेश किए गए प्रोजेक्ट एवं तथ्यों को सुप्रीमकोर्ट ने मान्य रखा है। जिसके तहत इतर प्रवृत्तियों की फीस को अनिवार्य नहीं किया गया बल्कि वैकल्पिक रखा है।
वैकल्पिक फीस की प्रवृत्तियां तय करेगी सरकार
चुड़ास्मा ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट ने यह भी निर्दे दिया है कि शिक्षा फीस के अलावा निजी स्कूल किन इतर प्रवृत्तियों के लिए वैकल्पिक फीस ले सकते हैं। ऐसी प्रवृत्तियों की एक सूची सरकार तय करेगी। एक सप्ताह में इसकी जानकारी निजी स्कूल संचालकों को देगी।
Published on:
11 Jul 2018 09:56 pm
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