
Rabies: तीन डोज वाली रैबीज की वैक्सीन ‘थ्रेबिस’ बाजार में, दुनिया में पहली
अहमदाबाद. हर वर्ष भारत में डेढ़ करोड़ लोगों को जानवर काटते हैं। इनमें से 90 फीसदी मामले कुत्ते के काटने के होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक वैक्सीन का कोर्स पूरा नहीं करने के चलते हर वर्ष रेेबीज (कुत्ते के काटने से) से भारत में प्रतिवर्ष 25 से 30,000 मौत होती है। वहीं विश्व में रैबीज से 59 हजार मौतें होती हैं।
फिलहाल रेबीज से निबटने के लिए पांच डोज वाली वैक्सीन उपलब्ध है। अब अहमदाबाद की फार्मा कंपनी कैडिला फार्मास्युटिकल्स ने यह ऐलान किया है कि कंपनी ने रैबीज के खिलाफ सिर्फ 3 डोज की वैक्सीन ‘थ्रेबिस’ विकसित की है जो दुनिया में ऐसी पहली वैक्सीन है।
यह वैक्सीन आगामी 18 अप्रैल से बाजार में उपलब्ध होगी। इसका कोर्स एक सप्ताह में पूरा होगा इससे 0 दिन, तीसरे और सातवें दिन लगाना होगा।
पहले कुत्ते के काटने पर 14 इंजेक्शन लेने पड़ते थे। इसके बाद यह संख्या 5 हो गई है। कंपनी ने 12 वर्ष के शोध के बाद तीन डोज वाले इस नई वैक्सीन को विकसित किया है।
इससे रेबीज के नियंत्रण में मदद मिलेगी। भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक रेबीज को मिटाना है। यह वैक्सीन नैनो पार्टिकल आधार जी प्रोटीन वैक्सीन है जिसमें वायरस की तरह पार्टिकल तकनीक का उपयोग किा गया है। क्लीनिकल ट्रायल में वैक्सीन को सुरक्षित पाया गया है। इस वैक्सीन को ड्रग महानियंत्रक की ओर से मंजूरी दी जा चुकी है। पहले चरण में यह वैक्सीन गुजरात के साथ देश के 11 राज्यों में लांच की जाएगी।
गेम चेंजर साबित होगी वैक्सीन
कंपनी के सीएमडी राजीव मोदी के मुताबिक तीन डोज वाली नई वैक्सीन से कई जिदंगी को बचाया जा सकेगा। यह वैक्सीन रैबीज के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में काफी अहम होगी। कंपनी के निदेशक गिरधर बलवानी ने बताया कि यह वैक्सीन गेम चेंजर साबित होगी क्योंकि वर्तमान में सभी रैबीज वैक्सीन पांज डोज वाली हैं जो 28 दिनों तक चलती हैं। कुत्ते के काटने के बाद लोग पांच डोज का कोर्स पूरा नहीं करते। क्योंकि यह लंबा और जटिल होता है। इस कारण कई लोग असुरक्षित रह जाते हैं और इससे मौतें होती हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी भारत सरकार के साथ मिलकर रेबीज के नियंत्रण के लिए काम करना चाहती है। भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक रैबीज को मिटाने का लक्ष्य रखा है।
भारत विकासशील देशों को कर सकता है आपूर्ति
एशिया और अफ्रीका के विकासशील देशों में रैबीज से ज्यादा मौते होती हैं। आत्मनिर्भर भारत के पहल के तहत यह वैक्सीन विकसित की गई है। इससे भारत इन विकासशील देशों को वैक्सीन की आपूर्ति कर सकता है। कंपनी भारत सरकार के साथ मिलकर रेबीज के नियंत्रण के लिए काम करना चाह रही है।
सिर्फ 30 लाख लोग चिकित्सक के पास जाते
कंपनी के सर्वे के मुताबिक डेढ़ करोड़ लोगों में से सिर्फ 30 लाख लोग ही रैबीज को लेकर वैक्सीन के लिए चिकित्सक के पास जाते हैं। हालांकि 30 फीसदी पीडि़त चौथी डोज और 40 फीसदी पांचवीं व अंतिम डोज नहीं लेते हैं जिससे रैबीज के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कुत्ते काटने से सर्वाधिक मौत यूपी में
कंपनी ने एक सर्वे के मुताबिक यह दावा किया कि देश में कुत्ते काटने से सबसे ज्यादा मौत यूपी में होती है। इसके बाद बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली, आंध्र प्रदेश व ओडिशा शामिल हैं। मौत का मुख्य कारण वैक्सीन के सभी पांच वैक्सीन नहीं लगवाना है।
Published on:
08 Apr 2022 10:24 pm
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