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राजकोट मंडल में वांकानेर-नवलखी रेल खंड पर सिग्नलों का स्थानांतरण

पश्चिम रेलवे के राजकोट मंडल द्वारा वांकानेर-नवलखी रेल खंड पर अप्रेल महीने में सिग्नलों का स्थानांतरण किया गया है। कुल 8 राइट हैंड साइड सिग्नलों को लेफ्ट हैंड साइड में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। इनसे रेलवे संरक्षा एवं सुचारु ट्रेन संचालन को और सुदृढ़ होगी। राजकोट के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सुनील कुमार मीना के अनुसार, इस कार्य में प्रमुख रूप से मोरबी, बरवाला रोड, दहिसरा तथा बरवाला रोड-दहिसरा आदि महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।

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वांकानेर-नवलखी रेल खंड पर सिग्नलों का स्थानांतरण।

कुल 8 राइट हैंड साइड सिग्नलों को लेफ्ट हैंड साइड में लगाया, संरक्षा और संचालन दक्षता होगी मजबूत

राजकोट. पश्चिम रेलवे के राजकोट मंडल द्वारा वांकानेर-नवलखी रेल खंड पर अप्रेल महीने में सिग्नलों का स्थानांतरण किया गया है। कुल 8 राइट हैंड साइड सिग्नलों को लेफ्ट हैंड साइड में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। इनसे रेलवे संरक्षा एवं सुचारु ट्रेन संचालन को और सुदृढ़ होगी।
राजकोट के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सुनील कुमार मीना के अनुसार, इस कार्य में प्रमुख रूप से मोरबी, बरवाला रोड, दहिसरा तथा बरवाला रोड-दहिसरा आदि महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। यह तकनीकी उन्नयन भारतीय रेलवे के मानकों के अनुरूप किया गया है, जिससे ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित, सुचारु एवं दक्ष बन सके।
मीना के अनुसार, इस तरह सिग्नल स्थापित होने से खतरे की संभावना में कमी आती है, जिससे ट्रेन संचालन और अधिक सुरक्षित बनता है। सिग्नल की स्पष्ट एवं समय से पूर्व दृश्यता के कारण लोको पायलट को ब्रेक लगाने एवं गति नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है, जिससे आकस्मिक ब्रेकिंग की आवश्यकता कम होती है। लेफ्ट साइड पर सिग्नल होने से यह चालक की सीधी दृष्टि में आता है तथा दृश्यता बाधित होने की संभावना न्यूनतम रहती है। भारतीय रेलवे में अधिकांश सिग्नल लेफ्ट हैंड पर स्थापित होते हैं, जिससे सभी सेक्शनों में एकरूपता बनी रहती है और लोको पायलट के लिए संचालन सहज होता है।
राजकोट मंडल रेल प्रबंधक गिरिराज कुमार मीना ने कहा कि वांकानेर-नवलखी रेल खंड पर सिग्नलों को राइट हैंड साइड से लेफ्ट हैंड साइड में स्थानांतरित करना रेलवे सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रकार के तकनीकी सुधारों से न केवल लोको पायलट को बेहतर दृश्यता मिलती है, बल्कि ट्रेनों के सुरक्षित, विश्वसनीय एवं सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।