29 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जांच रिपोर्ट में खुलासा ब्लड प्लाज्मा मिलावटी, लोगों की जिंदगी के लिए खतरनाक

-बी.जे.मेडिकल कॉलेज पैथोलॉजी रिपोर्ट में खुलासा, जब्त प्लाज्मा के 1140 बैग किए जाएंगे नष्ट, महाराष्ट्र की आठ ब्लड बैंकों में मिलावटी प्लाज्मा बेचने की आशंका, महाराष्ट्र पुलिस की मदद से की जा रही है जांच
2 min read
Google source verification
Blood plasma

जब्त ब्लड प्लाज्मा (फाइल फोटो)।

Ahmedabad. जिले के चांगोदर क्षेत्र से 23 जून को जब्त की गईं मिलावटी ब्लड प्लाज्मा की 1140 बैग (यूनिट) लोगों की जिंदगी के लिए खतरनाक होने की बात सामने आई है। बी.जे.मेडिकल कॉलेज की लैबोरेटरी में भेजे गए इसके सैंपल की जांच रिपोर्ट में इसे फूड एंड ड्रग्स के स्टैंडर्ड नीति-नियमों के तहत बहुत ही हल्की गुणवत्ता का पाया गया है। इसे लोगों की जिंदगी के लिए खतरनाक बताया है।

जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओमप्रकाश जाट ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि जांच रिपोर्ट में ब्लड प्लाज्मा को मिलावटी और लोगों के लिए खतरनाक बताए जाने के चलते इसे नष्ट किया जाएगा। 11 लाख रुपए कीमत के इन 1140 ब्लड प्लाज्मा बैग को जल्द ही नष्ट करने की प्रक्रिया की जाएगी। इन्हें मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी के घर से जब्त किया जाएगा।

महाराष्ट्र की 8 ब्लड बैंक में बेचे जाने को लेकर जांच

जाट ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि इस मामले में पकड़े गए चार आरोपियों में से मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी चांगोदर की कंपनी में बनाए जाने वाले ब्लड प्लाज्मा बैग को कंपनी के ड्राइवर व उसके साथी की मदद से बीच रास्ते में ले लेता था। उसमें से 50 फीसदी प्लाज्मा निकालकर इतनी ही मात्रा में सेलाइन वॉटर मिला देता था। फिर ड्राइवर को देता जो उसे जहां ले जाना होता वहां ले जाते थे। निकाले गए प्लाज्मा की अलग बैग को सेलाइन वॉटर मिलाकर तैयार करता और फिर उसे महाराष्ट्र के वाशिम और जालना के ब्लड बैंकों में बेचता था। ऐसी आठ ब्लड बैंकों के नाम सामने आए हैं, जिसमें इसे बेचे जाने की आशंका है।

महाराष्ट्र पुलिस की मदद से इस मामले की जांच की जा रही है। ब्लड बैंकों के संचालकों की लिप्तता और भूमिका की भी जांच जारी है। इन ब्लड बैंकों के जरिए इसे कंपनियों में बेचा जाता था। जाट ने दावा किया कि मिलावटी ब्लड प्लाज्मा को गुजरात में बेचे जाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। इस मामले में फूड एंड ड्रग्स विभाग, गुजरात स्टेट काउंसिल फॉर ब्लड ट्रांसफ्यूजन, स्वास्थ्य विभाग के नीति नियमों के तहत जांच जारी है। इसकी रिपोर्ट को राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के साझ साथा किया जाएगा ताकि ब्लड प्लाज्मा के मामले में जरूरी नीति-नियम, स्टैंडर्ड ऑपरेशन ऑफ प्रोसीजर में जरूरी बदलाव और सुधार किए जा सकेंगे।