18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Gujarat Women Empowerment: ऋण लेकर शुरू किया रेडिमेड का काम, अब दे रही हैं रोजगार

सिलाई मशीन खरीद दाहोद की गांव की महिला सुमित्रा ने शुरू किया व्यापार बनाया कमाई का जरिया

2 min read
Google source verification
Gujarat Women Empowerment: ऋण लेकर शुरू किया रेडिमेड का काम, अब दे रही हैं रोजगार

Gujarat Women Empowerment: ऋण लेकर शुरू किया रेडिमेड का काम, अब दे रही हैं रोजगार,Gujarat Women Empowerment: ऋण लेकर शुरू किया रेडिमेड का काम, अब दे रही हैं रोजगार,Gujarat Women Empowerment: ऋण लेकर शुरू किया रेडिमेड का काम, अब दे रही हैं रोजगार

संतोष जैन/बिनोद पाण्डेय
दाहोद. छोटे से गांव की महिलाओं की कोरोबारी सुझ-बूझ भी लोगों को कई बार अचरज में डाल देती है। उन्हें मौका मिले तो उनके हुनर और आइडिया को पंख लगते देर नहीं लगती है। परंतु इसके लिए सबसे पहले पूंजी की जरूरत उन्हें उनके सपनों को उड़ान भरने से रोकती है। इस दिक्कत को दूर करते हुए दाहोद की कठला गांव की सुमित्राबेन बामण ने सरकार की वाजपेयी बैंकेबल योजना से ऋण लेकर जहां अपने सपनों को सजाया वहीं अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करवा कर उनके लिए भी मददगार बन गईं हैं।


सुमित्रा शुरुआत में रेडिमेड गारमेंट का बहुत ही छोटे स्तर पर काम करती थी। इससे उन्हें कामचलाऊ आवक होती थी। हालंाकि इस दौरान वह रेडिमेड कपड़ों के व्यापारी के लिए सभी जरूरी चीजों को बखूबी समझने लगीं। इस कारोबार में आगे बढऩे के तौर-तरीकों को गांव की इस महिला ने बारीकी से जानने की कोशिश की। कारोबार बढ़ाने के लिए सुमित्रा को सर्वप्रथम नई मशीन और कच्चे माल की जरूरत पड़ी। यहां आया पूंजी का संकट। लेकिन वह हार नहीं मानी और अपने स्तर से प्रयास शुरू कर महिलाओं के स्वनिर्भर संबंधी सभी सरकारी योजनाओं का पता लगाना शुरू किया।
इस पर उन्हें सरकार की वाजपेयी बैंकेबल योजना के तहत 2.80 लाख रुपए का ऋण मिल गया। इस राशि से सर्वप्रथम उन्होंने 30 हजार रुपए की नई मशीन खरीदी। बाकी की रकम की कच्चा माल मंगवाया।

शुरुआत में छोटे स्तर पर व्यापार शुरू किया। काम बढऩे पर पहले एक फिर एक और कारीगर रखा। बताया गया कि व्यापार चल पड़ा और फिलहाल वे महीने में 50 हजार से अधिक की आय अर्जित करने में सफल हुई हैं। दो कारीगरों को महीने में वे 10 से 12 हजार रुपए वेतन भी दे रही हैं। स्वनिर्भर बनने की उनके इस प्रयास को हर ओर सराहा गया। सुमित्रा कहती हैं कि घर की महिलाओं को आगे बढऩे में एक बड़ी समस्या पूंजी की कमी है, लेकिन सरकार की स्वनिर्भर योजना इस दिशा में उन्हें कामयाबी की ओर ले आई है।