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गोंडल के विक्रमसिंह राणा हत्या प्रकरण, दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा

११ जनों को सबूतों के अभाव में निर्दोष छोड़ा, १५ जनों के विरुद्ध हुआ था मामला दर्ज, एक की हत्या व एक की हो गई थी मौत

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Vikram Singh Rana murder case in Gondal

Vikram Singh Rana murder case in Gondal

राजकोट. गोंडल के सनसनी खेज विक्रमसिंह राणा हत्या प्रकरण में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि ११ जनों को सबूतों के अभाव में निर्दोष छोड़ दिया।
इस मामले में १५ जनों के विरुद्ध शिकायत दर्ज की गई थी, जिनमें से एक की हत्या हो गई थी, जबकि एक की बीमारी के कारण मौत हो गई थी।
मामले के अनुसार गोंडल में १६ वर्ष पूर्व जमीन को लेकर दो गुटों में टकराव हुआ था। विवाद बढऩे से एक गुट ने वर्ष २०१३ में विक्रमसिंह प्रवीणसिंह राणा की हत्या कर दी थी। इस संबंध में मृतक की बहन की ननद राजश्रीबा जाडेजा ने गोंडल सिटी पुलिस थाने में १५ जनों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया था, जिसमें विनु शिंगाळा, रामजी उर्फ रामलो प्रागजी, हरेश मकनजी चोथाणी, लालजी गोबर सिदपरा, भरत लाधा छायाणी, नरसिंह भाणा मोणपरा, राजेश परषोत्तम दुधागरा, धर्मेन्द्र उर्फ धमो मनजी वैष्णव, कानजी उर्फ कानो हीरजी सोरठिया, जगदीश रणछोड़ खूंट, भरत सवजी वेकरिया, अजय डाया रादडिया, जगदीश लिंबाभाई खूंट, अमित दिनेश चावडिया एवं विजय केशव कयाडा शामिल हैं। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सभी जमानत पर छूट गए थे।
मामला अदालत में पहुंचने से न्यायाधीश ने रामजी उर्फ रामलो प्रागजी मारकणा एवं हरेश मकन चोथाणी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में संलिप्त विनु की हत्या हो गई थी, जबकि कानजी उर्फ कानो की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। बाकी ११ जनों को अदालत ने सबूतों के अभाव में गुरुवार को निर्दोष छोड़ दिया।