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एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण नीति बनाएगी सेप्ट यूनिवर्सिटी

देशभर में वर्ष २०३० तक एयरपोर्ट की संख्या को बढ़ाकर २५० करने के लिए प्रयासरत भारत सरकार व एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने जिम्मेदारी सेप्ट यूनिवर

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Sept University will form land acquisition policy for airport

Sept University will form land acquisition policy for airport

अहमदाबाद।देशभर में वर्ष २०३० तक एयरपोर्ट की संख्या को बढ़ाकर २५० करने के लिए प्रयासरत भारत सरकार व एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने जिम्मेदारी सेप्ट यूनिवर्सिटी एयरपोर्ट के लिए जरूरी भूमि अधिग्रहण की प्रभावी वैकल्पिक नीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

यूनिवर्सिटी का सेंटर फॉर अर्बन लैंड एंड रियल एस्टेट पॉलिसी यह नीति तैयार करेगा। सेप्ट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ.बिमल पटेल व फैकल्टी ऑफ प्लानिंग के डीन प्रो.विद्याधर फाटक के मार्गदर्शन में प्रो. रुतुल शर्मा, प्रो.ब्रजेश भाथा व प्रो.जिगनेश मेहता की संयुक्त टीम बनाई गई है।

सेप्ट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष बिमल पटेल ने बताया कि देश में बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए बड़ी ढांचागत परियोजनाओं के लिए भूमि की जरूरत पड़ेगी। मौजूदा भूमि अधिग्रहण की नीति कई मामलों में विफल रही है। क्योंकि इसमें ज्यादा समय लगने के साथ परियोजना की कीमत भी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की एक प्रभावी वैकल्पिक नीति होना अनिवार्य है। कई राज्यों ने इस दिशा में सराहनीय कदम उठाए हैं। इसके लिए उन्होंने लैन्ड री-एडजेसमेंट एवं लैन्ड पूलिंग (भूमि सुधार व भूमि संयोजन) व्यवस्था बनाई है। जो इस मामले में एक अच्छा विकल्प हो सकता है। पटेल ने बताया कि राज्य सरकारों के ऐसे ही कुछ बेहतर विकल्पों का अध्ययन करके, इनकी संभावनाएं तलाशते हुए यूनिवर्सिटी एयरपोर्ट के साथ साथ हाईवे, पोर्ट व अन्य औद्योगिक क्लस्टरों के लिए भूमि अधिग्रहण की अच्छी वैकल्पिक नीति तैयार करेगा।

दरअसल, एयरपोर्ट बनाने व उसे विकसित करने का काम करने वाली एएआई को एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन देना संबंधित राज्य सरकारों का काम है। एयरपोर्ट के नाम पर अनिवार्य रूप से जमीन आवंटन करना जरूरी है।

जिससे सरकारों की ओर से जमीन देने में काफी समय लग जाता है। जिसके चलते प्रक्रिया काफी समय ले लेती है साथ ही महंगी भी हो जाती है। इसे देखते हुए सरकार से मंजूरी लेकर एएआई ने एयरपोर्ट के लिए जरूरी भूमि को अधिग्रहित करने के लिए प्रभावी वैकल्पिक नीति तैयार करने को कहा है। जिसमें भूमि अधिग्रहण की अनिवार्यता ना हो।

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