
रैन बसेरों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराए सरकार
अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद महानगरपालिका सहित राज्य की सभी 8 महानगरपालिकाओं से शहरी बेघरों को रैन बसेरे मुहैया कराने का निर्देश दिया है। सभी मनपाओं से इन रैन बसेरों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने को भी कहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता विश्वास भांबुरकर ने वकील के आर कोष्टी के मार्फत दायर याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को वर्ष 2003 में पेश शपथपत्र के मुताबिक अहमदाबाद में 45 सहित राज्यभर में 101 रैन बसेरे थे। हालांकि लगभग सभी मनपा में कई रैनबसेरे बंद हैं। अहमदाबाद के 45 में से 20 रैनबसेरे बंद हैं। राज्य सरकार की ओर से दीनदयाल अंत्योदय योजना-नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन के तहत रैन बसेरे के आंकड़े के मुताबिक राज्य में वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक कुल 84,822 शहरी गरीब बेघर हैं जबकि कुल 101 रैनबसेरों में सिर्फ 6430 लोगों के लिए ही क्षमता है।
राज्य सरकार की ओर से रैनबसेरे के लिए 31 मार्च 2017 तक की स्थिति के मुताबिक 48 करोड़ के फंड में से एक भी रुपए खर्च नहीं किया गया। राज्य सरकार ने मार्च 2017 में आवंटित 4785 लाख का एक भी पैसा खर्च नहीं किया। इससे पता चलता है कि राज्य सरकार व मनपा प्रशासन की शहरी बेघरों को पर्याप्त मात्रा में रैनबसेरे उपलब्ध कराने में रूचि नहीं है। इस तरह गरीबों की उपेक्षा कर उन्हें संविधान में दिए गए सम्मापूर्वक जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई जस्टिस कैलाश गंभीर समिति की सिफारिशों को राज्य सरकार या मनपाओं ने अमल नहीं किया है। राज्य में शहरी बेघरों की संख्या 84, 822 है। शहरी बेघरों की पहचान के लिए सर्वेक्षण नहीं हो सका है।
Published on:
12 May 2019 01:01 am
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